
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। दोनों दलों ने 2024 का लोकसभा चुनाव इंडिया गठबंधन के तहत मिलकर लड़ा था। उस चुनाव में सपा ने 37 और कांग्रेस ने छह सीटें जीतकर प्रदेश की राजनीति में अपनी स्थिति मजबूत की थी।
हालांकि, लोकसभा चुनाव के नतीजों को विधानसभा चुनाव में जीत की गारंटी नहीं माना जा सकता। दोनों चुनावों के मुद्दे, स्थानीय समीकरण और उम्मीदवारों की भूमिका अलग-अलग होती है। ऐसे में 2027 के चुनाव के लिए सीटों का तालमेल दोनों दलों के सामने अहम चुनौती होगा।
कांग्रेस के लिए विधानसभा चुनाव प्रदेश में अपना संगठन और राजनीतिक आधार मजबूत करने का अवसर है। पार्टी 2022 के विधानसभा चुनाव में केवल दो सीटें जीत सकी थी। ऐसे में अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग उसके लिए राजनीतिक विस्तार की रणनीति का हिस्सा हो सकती है। लेकिन इस मांग को मजबूत बनाने के लिए कांग्रेस को अपने संगठन, स्थानीय जनाधार और संभावित उम्मीदवारों की चुनावी क्षमता का आकलन भी सामने रखना होगा।
दूसरी ओर, सपा सीटों के बंटवारे में अपने संगठन और पिछले चुनावों के प्रदर्शन को आधार बना सकती है। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 255 और सपा ने 111 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस दो सीटों पर सिमट गई थी। इसलिए बातचीत में 2022 के नतीजों के साथ 2024 के लोकसभा चुनाव में विधानसभा क्षेत्रवार प्रदर्शन भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
सीट बंटवारे में उन क्षेत्रों को लेकर पेच फंस सकता है, जहां दोनों दलों के नेता टिकट की दावेदारी करेंगे। उम्मीदवारों का चयन, स्थानीय समीकरण और कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल भी गठबंधन की सफलता को प्रभावित करेंगे।
फिलहाल 2027 के लिए दोनों दलों के बीच किसी अंतिम सीट समझौते की पुष्टि नहीं हुई है। गठबंधन का भविष्य औपचारिक बातचीत और आपसी सहमति पर निर्भर करेगा।

