How has AI impacted our life?

ChatGPT Image Nov 7 2025 09 16 46 AM

How has AI impacted our life: हाल ही में एक अमेरिकी यूट्यूबर के पॉडकास्ट में एलन मस्क ने AI पर एक बड़ा कमेंट करते हुए कहा कि आने वाले पांच से छ: साल में वो फोन नहीं रहेंगे जैसा हम आज इस्तेमाल कर रहे हैं। कोई ऐप से ऑपरेटिंग सिस्टम भी नहीं होंगे। केवल एक AI डिवाइस होगा जो आपकी जरूरत का वीडियो बनाकर पेश कर देगा।

आमतौर पर लोगों को यह लग रहा था कि AI के आने से सिर्फ राइटर्स और कॉपीराइटर्स को ही खतरा होगा। लिटरेचर में दिलचस्पी रखने वालों को ही खतरा होगा। लेकिन अब यह थ्रेट वीडियो बनाने वाले और बाकी फील्ड में एक्टिव लोगों के लिए भी बढ़ गया है। सवाल यह है कि क्या एआई को इंडियन पब्लिक अभी अडॉप्ट कर पाई है? और अगर हम एआई के अकॉर्डिंग नहीं बदले तो क्या सच में एआई हमारी जॉब्स खा जाएगा?

दोस्तों एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज पूरी दुनिया में तेजी से फैल रहा है। ये एक ऐसा टेक्नोलॉजिकल रेवोल्यूशन है जिसने हमारे रोज की जिंदगी के हर पहलू को इंपैक्ट किया है। आज के एआई मॉड्यूल्स फ्यूचर की इकॉनमी को एक नया आकार दे रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ ऑटोमेशन और कंप्यूटर प्रोग्रामिंग तक ही सीमित नहीं है बल्कि अब इसने एजुकेशन, हेल्थ, फार्मिंग, मैन्युफैक्चरिंग, बिजनेस, एंटरटेनमेंट और यहां तक कि सरकारी पॉलिसीज पर भी एक गहरा असर छोड़ा है।

आज दुनिया में बढ़ रहा एआई का ट्रेंड ना सिर्फ हमको आने वाले टाइम के लिए तैयार रहने के लिए सचेत कर रहा है बल्कि दुनिया को भी बदल रहा है। आज की दुनिया में एआई का ग्लोबल मार्केट $391 अरब डॉलर के लगभग आंका गया है। ऐसा अनुमान है कि 2033 तक ये नौ गुना बढ़ सकता है।

मतलब ये भ्रम की स्थिति ही एआई को और ज्यादा खतरनाक बनाती है। प्राइवेट इन्वेस्टमेंट की बात करें तो 2024-25 में एआई के अंदर 40% से अधिक की बढ़ोतरी हुई है और ये ट्रेंड आगे और भी बढ़ने वाला है। आज चाहे ऑनलाइन फूड डिलीवरी वाला हो या आपको कोई भी सर्विज देने वाला प्लेटफार्म हो, सब ने अपने एआई मॉड्यूल्स बना लिए हैं। अमेरिका, यूरोप और चीन इसमें सबसे आगे हैं। जहां तक बात भारत की है तो हम भी ज्यादा पीछे नहीं है।

भारत भी एआई स्किल और इनोवेशन में एक नई तेजी दिखा रहा है। ai पर रिसर्च पेपर पब्लिश करने में हमारा देश चीन और अमेरिका के बाद तीसरे नंबर पर है। Tata, Mahindra और ऐसी कई कंपनियां आज एआई रिसर्च और इनोवेशन में एक बड़ा इन्वेस्टमेंट करके बैठी हैं। आईएमएफ की एक स्टडी के अनुसार एआई तकनीक से आने वाले दशक में ग्लोबल जीडीपी में 1.3 से 4% तक की वृद्धि होगी। जिन देशों ने इस ओर पहले से काम किया है उनको ज्यादा फायदा होगा। साथ ही जो देश एआई को अडॉप्ट नहीं कर पाए वो पूरी तरह से बाकी देशों पर डाटा शेयरिंग के लिए डिपेंडेंट हो जाएंगे। इसके साथ ही एआई मॉड्यूल्स में विकसित देश सर्विस को आउटसोर्स करके भी पैसे बना सकते हैं।

ये एक ऐसी फाइनेंसियल ग्लोबल इनकलिटी को बढ़ाएगा जो आने वाले टाइम पर खुद को दुनिया का दादा समझने वाले देशों को भी सक्ते में ले आ सकती है। भारत की बात करें तो अब तक 16% ग्लोबल एआई टैलेंट में अपनी भागीदारी भारत ने निभाई है। आसान शब्दों में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली एआई टेक्नोलॉजी को अपना चुका है।

जहां एआई रिलेटेड स्किल डेवलपमेंट बहुत तेजी से हो रहा है। दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे जैसी टेक्नोलॉजिकल हब्स में एआई रिसर्च डेवलपमेंट तेजी से हो रहा है। इसके अलावा टिए टू और टिए थ्री शहरों में भी एआई लैब्स, ट्रेनिंग सेंटर्स और स्टार्टअप्स की शुरुआत हो रही है। इतना ही नहीं एआई का इस्तेमाल इंडियन एजुकेशन फील्ड में अडॉप्टिव लर्निंग टूल्स के रूप में भी हो रहा है। जो स्टूडेंट्स की सीखने की जो स्पीड और स्टाइल के हिसाब से स्टडी मटेरियल भी प्रोवाइड कराता है।

वहीं फार्मिंग में एआई फसल की पैदावार बढ़ाने, मौसम का पूर्वानुमान लगाने, स्मार्ट इरीगेशन और पेस्ट कंट्रोल में भी होश उड़ा देने वाला सुधार ला रहा है। यानी एआई देखो एकदम फंडामेंटल लेवल पे भी काम कर रहे हैं। यानी फार्मिंग में। हेल्थ केयर फील्ड की बात करें तो एआई द्वारा रिजल्ट्स और पेशेंट्स के उपचार के प्रोसेस को भी बेहतर किया गया है।

अब ai की यही जरूरत हमें डराती भी है। एलन मस्क ने चेतावनी दी है कि ये टेक्नोलॉजी इतनी सक्षम हो जाएगी कि ये सभी ट्रेडिशनल जॉब्स छीन सकती है। उनका मानना है कि फ्यूचर में इंसान को अपनी पसंद के अनुसार काम करने की आजादी मिलेगी। हालांकि पीडब्ल्यूसी की एक रिपोर्ट कहती है कि एआई एक्चुअली में इंसान या यूं कहें ह्यूमन रिसोर्सेज को अधिक वैल्यूुएबल बना सकती है और नई नौकरियां भी पैदा कर सकती है। मगर ये सब बात इस पर डिपेंड करती है कि आने वाले टाइम पर दुनिया जिस तरह से एआई को अडॉप करती है।

एआई आज दुनिया की इकॉनमी में एक बड़ा फैक्टर है। स्टैनफोर्ड एचएआई की रिपोर्ट बताती है कि एआई इन्वेस्टमेंट में 26% की वृद्धि हुई है। इसमें अमेरिका सबसे बढ़िया क्वालिटी की एआई में एक इन्वेस्टर है। व यूरोप और चीन भी इसमें पीछे नहीं है। आईएमएफ की रिपोर्ट में लिखा है कि एआई बेस्ड प्रोडक्शन ग्रोथ से ग्लोबल जीडीपी 4% बढ़ सकती है। इसके अलावा एआई से होने वाली टेक्नोलॉजिकल रेवोल्यूशन से ट्रेडिशनल मैन्युफैक्चरिंग रेट में भी बदलाव आएगा।

अमेरिका जैसे डेवलप्ड देशों में एआई के कारण सर्विस सेक्टर की कीमतें कम होंगी। जिससे उनकी करेंसी को वैल्यू कुछ हद तक अफेक्ट करेगी। भारत में इसको देखते हुए डाटा फॉर डेवलपमेंट नामक पहल शुरू की गई है जो डाटा शेयरिंग करके एआई के लिए बेहतर मॉडल और डिसीजन लेने में हेल्प करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रोन ने मिलकर एआई से रिलेटेड ग्लोबल अवेयरनेस और पॉलिसी डेवलपमेंट को आगे बढ़ाया है।

भारत के कई स्टार्टअप्स एआई में इनोवेशन कर रहे हैं जो कि ग्रामीण और शहरी दोनों सेक्टर्स में जॉब और सर्विस बेटरमेंट को बढ़ावा दे रहे हैं। इंडियन स्टार्टअप्स में सबसे जरूरी एआई बेस्ड प्रोडक्ट्स जैसे एआई पावर्ड हेल्थ केयर डायग्नोस्टिक्स, वॉइस बेस्ड बैंकिंग, स्मार्ट एग्रीकल्चर टूल्स और एटेक सलूशन में कमेंडेबल काम किया है। महाराष्ट्र में किसानों ने एआई के सहारे मौसम की सटीक जानकारी पाकर क्रॉप प्रोडक्शन और नुकसान को कंट्रोल किया है। बिहार के सरकारी अस्पतालों में एआई आधारित रेडियोलॉजी उपकरण से बीमारियां ठीक करने का प्रोसेस और तेज और सटीक हुआ है। ये सभी उदाहरण ये बताते हैं कि एआई केवल टेक्नोलॉजी इनोवेशन तक ही सीमित नहीं है। बल्कि इसके सोशल और फाइनेंसियल इंपैक्ट भी गहरे हैं।

लेकिन एआई का बढ़ता हुआ इस्तेमाल काफी खतरनाक भी है। यह आपकी प्राइवेसी, डेटा सिक्योरिटी और मोरल इवैल्यूएशन के लिए बहुत ध्यान देने वाली बात है। सरकारों को यह सुनिश्चित करना होगा कि एआई का विकास ह्यूमन राइट्स के साथ फिट बैठे। ओपन एआई और क्लोज्ड एआई मॉडल के बीच बैलेंस बनाना भी ग्लोबल चैलेंज में से एक है। क्योंकि इससे इनोवेशन और कंट्रोल दोनों अफेक्ट होते हैं। भारत में इसको लेकर एक व्यापक नीति निर्माण और अंतरराष्ट्रीय सपोर्ट की आवश्यकता होगी।

सिक्योरिटी एजेंसी से लेकर आम सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वाले तक रोज इनोवेट हो रहे ये एआई मॉड्यूल्स ना चाहते हुए भी हमारी सोसाइटी को बदलने के लिए मजबूर कर रहे हैं। इसके साथ ही एआई मॉडल ह्यूमन प्रिजुडिस मतलब मानव पूर्वाग्रहों को दोहरा सकते हैं। जैसे एक अमेरिकी एआई टूल ने भर्ती प्रक्रिया में मेल उम्मीदवारों को प्रायोरिटी दी जिससे लोगों को चुने जाने की प्रक्रिया में सीधे भेदभाव सामने आया। इसी तरह क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में भी एआई के पक्षपात ने नस्ली इनकलिटी को बढ़ाया है। एआई टेक्नोलॉजी की वजह से डीप फेक का इस्तेमाल करके फाइनेंसियल फ्रॉड, साइबर बुलिंग और इसका इस्तेमाल राजनीतिक हथकंडों के लिए भी किया जाता है। इसके साथ ही एआई के गलत इस्तेमाल या खराब डिज़ाइन से बड़े सोशल और फाइनेंसियल नुकसान भी हो सकते हैं।

अभी हाल ही में जिलों का एबेज घर खरीदने का मॉडल भारी फाइनेंसियल घाटे में चला गया। जहां कंपनी को $500 मिलियन डॉलर्स का लॉस हुआ। इसीलिए एआई से बढ़ने वाला डर हमें डराता है। जानवी कपूर जैसे कई एक्ट्रेसेस के डीप फेक आज सोशल मीडिया पर असर डाल रहे हैं। ये तो पब्लिक फिगर है लेकिन प्राइवेट लाइफ में जी रहे लोगों के डेटा के साथ भी क्या हो रहा है हमें पता ही नहीं है। हमारे फिंगरप्रिंट से लेकर फोटोस और डेटा तक उसकी प्राइवेसी की क्या गारंटी है।

सब मिलाकर दोस्तों बदलती हुई दुनिया में एआई मॉडल्स ना सिर्फ नए चैलेंजेस ला रहे हैं बल्कि नई ओपोरर्चुनिटीज भी ला रहे हैं। यानी जितने पॉजिटिव्स हैं उतने ही चैलेंजेस भी हैं, नेगेटिव्स भी हैं। देखना ये है कि बदलती हुई दुनिया में हम कहां तक एआई को समझ पाते हैं। बाकी ai से आपका कितना सामना हुआ है? किस टूल को आप सबसे ज्यादा यूज करते हैं? क्या लगता है यह फायदेमंद होगा? यह लोगों की जॉब खाएगा या पॉजिटिव होगा और लोगों को और जॉब्स क्रिएट करके देगा?

यहां पाइंट्स में समझते हैं कि AI हमें कैसे प्रभावित कर रहा है

  1. Automation of Tasks:
    AI automates repetitive work in industries, offices, and homes — saving time and increasing productivity.
  2. Improved Healthcare:
    AI helps doctors diagnose diseases, predict risks, and assist in robotic surgeries and drug discovery.
  3. Personalized Recommendations:
    Platforms like YouTube, Netflix, and Amazon use AI to suggest content and products based on user behavior.
  4. Smart Assistants:
    Voice assistants like Siri, Alexa, and Google Assistant simplify daily tasks like reminders, searches, and controlling devices.
  5. Enhanced Transportation:
    AI powers self-driving cars, traffic management systems, and route optimization for delivery services.
  6. Education & Learning:
    AI enables personalized learning, virtual tutors, and language translation tools for students worldwide.
  7. Finance & Banking:
    AI detects fraud, automates trading, and helps customers through chatbots and predictive analytics.
  8. Agriculture & Environment:
    AI monitors crop health, predicts weather, and supports sustainable farming and conservation efforts.
  9. Improved Security:
    Facial recognition, surveillance, and cybersecurity systems rely on AI for quick threat detection.
  10. Entertainment & Creativity:
    AI assists in music composition, video editing, art creation, and even scriptwriting.
  11. Customer Service:
    AI chatbots and virtual agents provide 24/7 support, improving efficiency and response times.
  12. Employment & Workforce:
    AI creates new job opportunities in data science and automation but also replaces some manual roles.

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