दिल्ली-एनसीआर में बारिश ने जहां गर्मी और उमस से राहत दी है, वहीं वायु प्रदूषण के मोर्चे पर भी लोगों को बड़ी राहत मिली है। बारिश के बाद हवा में मौजूद प्रदूषक कणों का स्तर घटा है और राजधानी के अनेक इलाकों में वायु गुणवत्ता अच्छी या संतोषजनक श्रेणी में पहुंच गई है। लंबे समय से प्रदूषित हवा झेल रहे लोगों के लिए यह बदलाव निश्चित रूप से सुखद है।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के कई इलाकों में एक्यूआई काफी नीचे आया है। अलीपुर में यह 27, बवाना में 35, बुराड़ी क्रॉसिंग में 39 और आया नगर में 44 दर्ज किया गया। आनंद विहार में 66 और चांदनी चौक में 69 का स्तर रहा। नोएडा के सेक्टर-62 में एक्यूआई 29 और सेक्टर-125 में 40 दर्ज किया गया। गाजियाबाद के इंदिरापुरम में यह 22 और गोविंदपुरम में 28 रहा। हालांकि कुछ स्थानों पर स्थिति अपेक्षाकृत खराब भी रही और वेव सिटी में एक्यूआई 103 दर्ज किया गया।
इन आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि बारिश वायु गुणवत्ता को तत्काल सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वातावरण में मौजूद धूल और प्रदूषक कण बारिश के साथ नीचे आ जाते हैं और हवा कुछ समय के लिए साफ महसूस होती है। लेकिन यही इस राहत की सबसे बड़ी सीमा भी है। अगर प्रदूषण पैदा करने वाले स्रोतों पर नियंत्रण नहीं किया गया तो बारिश रुकने के बाद वही समस्या फिर सामने आ सकती है।
मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों में मौसम अपेक्षाकृत सुहावना रहने और तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी की संभावना है। बारिश की संभावना कम होने के साथ उमस बढ़ सकती है। ऐसे मौसम में प्रदूषण का स्तर दोबारा बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए वर्तमान साफ हवा को केवल मौसम की देन मानकर संतुष्ट हो जाना दूरदर्शिता नहीं होगी।
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की समस्या मौसमी जरूर दिखाई देती है, लेकिन इसके स्रोत पूरे वर्ष मौजूद रहते हैं। यातायात, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, औद्योगिक गतिविधियां और अन्य स्थानीय स्रोत हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। इसलिए प्रदूषण नियंत्रण की रणनीति केवल सर्दियों या पराली के मौसम तक सीमित नहीं रह सकती।
बारिश ने हमें यह दिखा दिया है कि वातावरण में प्रदूषण का भार कम होने पर हवा कितनी तेजी से बेहतर हो सकती है। अब आवश्यकता इस बात की है कि इस अस्थायी राहत को स्थायी सुधार में बदला जाए। इसके लिए सड़क की धूल पर नियंत्रण, निर्माण स्थलों पर नियमों का पालन, सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना और प्रदूषण फैलाने वाले स्थानीय स्रोतों की नियमित निगरानी जरूरी है।
स्वच्छ हवा कोई मौसमी सौगात नहीं, नागरिकों की बुनियादी जरूरत है। बारिश के बाद मिली राहत इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह प्रशासन और समाज दोनों को यह अवसर देती है कि वे देखें—जब प्रदूषण घट सकता है तो उसे लगातार कम रखने के लिए क्या किया जा सकता है। आसमान साफ होने के साथ अब नीति और व्यवस्था की दिशा भी उतनी ही साफ होनी चाहिए।


