
क्या सुल्तानपुर की कादीपुर विधानसभा सीट पर इस बार कोई बड़ा सियासी भूचाल आने वाला है?
क्या दो बार से अजेय रही भारतीय जनता पार्टी के इस मजबूत किले में समाजवादी पार्टी ने लगा दी है एक ऐसी गुप्त सेंध, जिसका अंदाजा विरोधियों को भी नहीं है?
सुल्तानपुर की वो इकलौती सीट… जहाँ पिछले दो चुनावों से समाजवादियों का किला ढह रहा है! एक ऐसी सुरक्षित सीट जहाँ इस बार टिकट की जंग ने ‘लखनऊ’ तक हड़कंप मचा दिया है! क्या अखिलेश यादव का एक गलत फैसला यहाँ हैट्रिक का रास्ता खोल देगा? 2027 के महामुकाबले की रणभेरी बजने से पहले ही सुल्तानपुर जनपद की कादीपुर सुरक्षित सीट पर सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच चुका है। हर गली, हर चौराहे पर बस एक ही सवाल गूंज रहा है—इस बार कादीपुर का बेताज बादशाह कौन बनेगा?
आइए सबसे पहले आपको ले चलते हैं फ्लैशबैक में, साल 2022 के उस चुनावी दंगल में जहां कांटे की टक्कर हुई थी। 2022 के नतीजों ने सबको चौंका दिया था। बीजेपी के राजेश कुमार गौतम ने 96,405 वोट हासिल करके एकतरफा जीत का दावा करने वाली समाजवादी पार्टी के भगेलू राम को 25,723 वोटों के बड़े अंतर से पटखनी दे दी थी। बहुजन समाज पार्टी के हीरा लाल 46 हजार से ज्यादा वोट लाकर तीसरे नंबर पर रहे थे। उस वक्त लगा था कि कादीपुर में बीजेपी को हिलाना नामुमकिन है। लेकिन रुकिए! असली रोमांच और संस्पेंस तो अब शुरू होता है।
2024 के लोकसभा चुनाव में इसी कादीपुर की धरती ने एक ऐसा चौंकाने वाला आंकड़ा सामने रखा, जिसने बीजेपी के थिंक टैंक की रातों की नींद उड़ा दी। जिस कादीपुर में बीजेपी 25 हजार से ज्यादा वोटों से जीती थी, 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान कादीपुर में बीजेपी की बढ़त घटकर मात्र 4,441 वोटों पर सिमट गई। जी हां, सिर्फ चार हजार चार सौ इकतालीस वोट! इस आंकड़े ने साबित कर दिया कि कादीपुर की हवा का रुख अब बदल रहा है।
इस बदलते रुख को भांपकर समाजवादी पार्टी के खेमे में टिकट के दावेदारों की एक लंबी और बेहद दिलचस्प फौज मैदान में उतर चुकी है। हर कोई खुद को 2027 का सिकंदर साबित करने में जुटा है।
दावेदारों की इस लिस्ट में पहला नाम है राहुल गौतम का, जो एक उभरते हुए युवा दलित चेहरे के रूप में गांवों में लगातार पसीना बहा रहे हैं। दूसरा नाम है 2022 के रनर-अप भगेलू राम का, जिनके पास 70 हजार से ज्यादा वोट बटोरने का पुराना तजुर्बा है।
तीसरे दावेदार हैं अंगद चौधरी, जो पूर्व विधायक रामचंद्र चौधरी के बेटे हैं और बीजेपी का दामन छोड़कर सपा की साइकिल पर सवार हुए हैं। और इन सबके बीच एक और नाम तेजी से गूंज रहा है—डॉ. दिलीप गौतम का, जिन्हें जनता के बीच एक पढ़े-लिखे और प्रखर चेहरे के रूप में काफी पसंद किया जा रहा है। श्रीराम पुष्कर और डॉ. राजकरन जैसे जमीनी नेता भी इस रेस को और ज्यादा रोमांचक बना रहे हैं।
कादीपुर का असली सस्पेंस इस बात पर टिका है कि क्या बसपा का वो 46 हजार का पारंपरिक कैडर वोट बैंक खिसककर सपा के ‘पीडीए’ यानी पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक फॉर्मूले के साथ जाएगा? अगर ऐसा हुआ, तो कादीपुर का इतिहास बदलना तय है। वहीं दूसरी तरफ, दो बार के मौजूदा बीजेपी विधायक को स्थानीय एंटी-इन्कंबेंसी और जर्जर सड़कों जैसे मुद्दों से भी पार पाना होगा।
दावेदार अनेक हैं, लेकिन सपा का आलाकमान किस पर भरोसा जताएगा, यह अभी भविष्य के गर्भ में है। पल-पल बदलते इस सियासी ड्रामे में ऊंट किस करवट बैठेगा, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा। कादीपुर की इस महाजंग की हर अंदरूनी खबर के लिए बने रहिए हमारे साथ।
पुराने चेहरे पर दांव या किसी बिल्कुल नए लड़ाके की एंट्री? अखिलेश यादव का एक फैसला कादीपुर की किस्मत बदल देगा! आपको क्या लगता है, कादीपुर से सपा का सबसे जिताऊ उम्मीदवार कौन है? राहुल गौतम, डॉ. राजकरण या डॉ. दिलीप गौतम? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखिए और ऐसी ही कड़क राजनीतिक अपडेट्स के लिए हमें फॉलो और सब्सक्राइब करना ना भूलें!”

