Kavi Sanjeev Tyagi: पीड़ाओं को शब्दों में पिरोते हैं संजीव

Kavi Sanjeev Tyagi: पीड़ाओं को शब्दों पिरोते हैं संजीव
Kavi Sanjeev Tyagi: पीड़ाओं को शब्दों पिरोते हैं संजीव
  • मेरठ, ई-रेडियो इंडिया

Kavi Sanjeev Tyagi: यूं तो मेरठ अपनी बहुत सारी खूबियों के लिए जाना जाता है, चाहे वह 10 मई 1857 की क्रांति की शुरुआत हो या ऐतिहासिक व सांस्कृतिक मिलन का अदभुत नौचंदी मेला हो। ऐसे ही मेरठ की धरती ने समय समय पर एक से बढ़कर एक साहित्यकारों की फौज पूरे देश को दी है। ऐसे ही एक कवि एवं लेखक के रूप में अपनी कविताओं से साहित्य जगत में छा जाने को तत्पर हैं कवि संजीव त्यागी…

लेखन की सभी विधाओं में पारंगत क्रांतिधरा मेरठ का ये साहित्यकार अपनी कलम से जब गद्दारों को धिक्कारता है तो सुनने वाले के भी रौंगटे खड़े हो जाते हैं। बात चाहे गद्य (लेख) की हो या पद्य (कविता) की, दोनों ही विधाओं में वह अपने समकालीन कवियों से अथवा लेखकों से आगे नजर आते हैं।

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जी हां, हम बात कर रहे हैं मेरठ के ओज कवि के रूप में देश के चर्चित कवि Kavi Sanjeev Tyagi जी की। कवि सम्मेलन के मंचों पर अपनी राष्ट्रवादी एवं देश भक्ति से भरी कविताओं से श्रोताओं में ऐसा माहौल बन जाता है कि भारत माता की जय और वंदे मातरम् के नारों से पूरा सभागार गूंज उठता है। रौंगटे खड़ी करती इनकी कविताएँ इसीलिये शायद कुछ कवियों ने इन्हें क्रान्तिकारी कवि का भी नाम दिया हुआ है।

एक हजार से ज्यादा रचनाएं कर चुके हैं Kavi Sanjeev Tyagi

समाज की लगभग हर समस्या पर अपनी कलम चलाने वाले संजीव जी ने अब तक एक हजार से अधिक गीत एवं कविताएँ लिखी है। अपनी पहली ही पुस्तक से प्रसिद्धि पाने वाले कवि संजीव त्यागी की गद्य में लिखी पुस्तक “आतंकवाद एक नासूर” की उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी ने भी काफी प्रशंसा की। इस पुस्तक की भाषा शैली अपने विषय को लेकर इतनी धारा प्रवाह के साथ आगे बढ़ती है कि सब कुछ आंखों के सामने चित्रित होने लगता है।

‘आतंवादियों के नाम संदेश’ में कवि महोदय ने अपनी सारी भावनायें उड़ेल कर बहुत ही संवेदनशील तरीके से दिल को छू लिया है। बहुत ही खूबसूरती से ज्वलंत मुद्दों पर कवि संजीव ने अपनी धारदार कलम चलाई है, जिससे यह पुस्तक पढ़ने को मजबूर कर देती है।

प्रकाशित काव्य संग्रह “सब रस केे रंग” जो कि कविताओं का साझा संकलन है, में संजीव की कविताएँ दूसरे कवियों से एकदम अलग नजर आती हैं। कविताओं का एक और प्रकाशित साझा संकलन “काव्य भास्कर” में भी अन्य कवियों के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में सफल रहे हैं। योगीजी की कार्य शैली से अत्यंत प्रभावित होकर संजीव त्यागी ने अपनी अगली पुस्तक योगीजी पर ही लिखी है, वह भी गद्य में लिखी है जिसका नाम है “कर्मयोगी” जो पूरी तरह से योगीजी की कर्मठता पर आधारित है।

इसके अलावा काव्य संग्रह के रूप में संजीव की एक और पुस्तक प्रकाशन के लिए तैयार है जिसका नाम है “चिंगारियां…… जब सुलग उठीं”

देश भक्ति में डूबी कलम से कवि संजीव ने एक से बढ़कर एक शानदार रौंगटे खड़े कर देने वाली कविताएँ लिखी हैं। इसके अलावा कविताओं में हर रस में लिखने वाले संजीव जब श्रृंगार रस में लिखते हैं तो शाब्दिक चयन इतनी खूबसूरती से करते हैं कि मन में रोमांस पैदा होने लगता है और फिर वही जादुई कलम बिछुड़े हुए प्रेमी प्रेमिका के दर्द को अपने शब्दों से कागज पर चित्रित कर देती है। धरती पुत्र किसान की पूरी जीवनी को एक कविता में किस प्रकार समेटा जा सकता है यह संजीव जी ने कर दिखाया है।

सैनिकों को देश का बेटा कहने वाले कवि संजीव ने कश्मीरी पंडितों के दर्द को अपने शब्दों से जीवंत कर दिया है। शहीद भगत सिंह पर लिखे शानदार गीत पर तो “दीवाना था आजादी का” नाम की एलबम भी बन चुकी है जिसे लोगों ने बहुत पसंद किया।

लगभग चार दर्जन से अधिक संस्थाओं से सम्मानित Kavi Sanjeev Tyagi आज कवि सम्मेलन के मंचों पर अपनी शानदार प्रस्तुति से अनेक राज्यों में मंचों की शोभा बढ़ा रहे हैं। शिक्षित परिवार से सम्बंध रखने वाले कवि संजीव त्यागी स्वयं भी एक शिक्षक रहे हैं, वो नाईस (अब शोभित विश्वविद्यालय मेरठ ) में कम्प्यूटर फेकल्टी रहे हैं एवं काठमांडू में भी कम्प्यूटर फेकल्टी के रूप में शिक्षण कार्य किया है।

Kavi Sanjeev Tyagi की पत्नी भी एक प्राईवेट कालेज में 25 वर्षों से अंग्रेजी शिक्षिका के रूप में कार्य कर रही हैं। आपका पुत्र हार्दिक यू पी ई एस (UPES) देहरादून से लाॅ कर रहा है एवं पुत्री अपूर्वा डी यू से बी. ए. आनर्स (अंग्रेजी) में द्वितीय वर्ष में है। आपके पिता स्व. श्री रमेश चंद त्यागी सरकारी विभाग में कार्यरत थे एवं माताजी स्व. श्रीमती शांति देवी एक गृहणी थी। Kavi Sanjeev Tyagi का निवास स्थान सैक्टर 2 मंगल पांडे नगर मेरठ में है।

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