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के, मैं जिंदा हूँ अभी के, मैं जिंदा हूँ अभी
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के, मैं जिंदा हूँ अभी

के, मैं जिंदा हूँ अभी
शहीद दिवस पर शहीदों को प्रणाम

शहीद के परिवार को
कुछ मुआवज़ा,
और शहीद को
दो मिनट का मौन।
बस, ड्यूटी खत्म।
फिर इसके बाद
कैसा शहीद?
शहीद कौन?

किसी मृतात्मा की
शांति के लिए
जब रखा गया
“दो मिनट का मौन”
तो सभी जीवात्माएँ
यही सोच रही थीं
कि कब दो मिनट हों।

“श्रद्धांजलि सभा के बाद
आज कोई कामकाज नहीं होगा।”
इस घोषणा पर कईयों के
दिल की कली खिल गई।
पूरे मनोयोग से
श्रद्धांजलि दी गई,
कि चलो, इसी बहाने
एक छुट्टी और मिल गई।

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