Patti Narendrapur Bhagasa Marg पर अधर में लटका विकास, सड़क निर्माण की धीमी रफ्तार पर सवाल…. Patti Narendrapur Bhagasa Marg से जुड़े जर्जर मार्गों पर जनता की बढ़ती नाराज़गी…. Patti Narendrapur Bhagasa Marg सहित क्षेत्रीय संपर्क मार्गों के उन्नयन की मांग तेज….
Patti Narendrapur Bhagasa Marg लंबे समय से क्षेत्रीय विकास और आवागमन की प्रमुख धुरी बना हुआ है, लेकिन सड़क निर्माण की सुस्ती और प्रशासनिक ढिलाई ने आम जनता को परेशानियों के अंधेरे में धकेल दिया है। Patti Narendrapur Bhagasa Marg से होकर ही शाहगंज तहसील, पटेला बाजार, भगासा और आसपास के ग्रामीण इलाकों का व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी सेवाओं से जुड़ाव संभव होता है, लेकिन वर्षों से जर्जर स्थिति में खड़े इस मार्ग को लेकर केवल आश्वासन मिलते रहे हैं, समाधान नहीं।
सुईथाकला/शाहगंज क्षेत्र के लोग लगातार सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कब बनेगा पट्टीनरेन्द्रपुर–भगासा संपर्क मार्ग? किसानों और मजदूरों की यह सीधी आवाज़ अब जन आंदोलन का रूप ले रही है। जनपद जौनपुर और उसके पड़ोसी जिलों सुल्तानपुर, आजमगढ़ और अम्बेडकरनगर को जोड़ने वाला यह इलाका आर्थिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र है, लेकिन खराब सड़कों ने विकास की रफ्तार को जकड़ रखा है।
स्थानीय संवाददाताओं के अनुसार, सरकार के निर्देशों को दरकिनार करते हुए जिन ठेकेदारों और विभागीय अधिकारियों पर गुणवत्तापूर्ण कार्य का दायित्व है, वे ही लापरवाही की हदें पार कर रहे हैं। परिणामस्वरूप किसान, मजदूर, दिहाड़ी श्रमिक और छोटे व्यवसायी अत्यधिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
Patti Narendrapur Bhagasa Marg: विकास का वादा और जमीनी सच
पूर्व कैबिनेट मंत्री और प्रदेश कांग्रेस पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीशंकर यादव के कार्यकाल में क्षेत्र में सड़कों का जाल बिछाने की शुरुआत हुई थी। उन्होंने कागज़ों में नहीं, बल्कि ज़मीन पर विकास की पहल की थी। उनके बाद कई जनप्रतिनिधि आए, जिन्होंने मंचों पर अपने व्यक्तित्व का प्रदर्शन किया और कुछ काम भी हुआ, परंतु Patti Narendrapur Bhagasa Marg तक परिवर्तन की वह लहर नहीं पहुंच सकी जिसकी क्षेत्रवासियों को उम्मीद थी।
पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री शैलेन्द्र यादव के कार्यकाल में बिजली व्यवस्था में बड़े सुधार हुए, अनेक विकास योजनाएँ लागू हुईं और कई संपर्क मार्गों का नवीनीकरण हुआ। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए वर्तमान विधायक रमेश सिंह ने शाहगंज विधानसभा में सड़कों के उच्चीकरण और चौड़ीकरण का कार्य आगे बढ़ाया। अनेक स्थानों पर सड़कें बनीं, कई प्रमुख मार्गों को दुरुस्त किया गया, और शाहगंज तहसील में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से क्षेत्र की पहचान भी बढ़ाई गई।
लेकिन Patti Narendrapur Bhagasa Marg आज भी उसी स्थिति में पड़ा है—जर्जर, टूटा, उखड़ा हुआ और जनता के लिए परेशानी का कारण।
व्यापार, परिवहन और दैनिक जीवन पर भारी असर
पट्टीनरेन्द्रपुर बाज़ार से शाहगंज तहसील तक पहुंचने वाला यह मार्ग व्यापारिक गतिविधियों की रीढ़ है। छोटे दुकानदार, ई-रिक्शा चालक, सब्ज़ी विक्रेता, छात्र, महिला समूह और ग्रामीण—सभी इसी सड़क पर निर्भर हैं। सड़क खराब होने के कारण—
- समय पर माल की आपूर्ति प्रभावित
- ई-रिक्शा और छोटे वाहनों में बार-बार ख़राबी
- मरीजों को अस्पताल तक पहुंचने में देरी
- स्कूली बच्चों को जोखिम
- बरसात में तालाब जैसी स्थिति
लोगों का कहना है कि जब तक यह सड़क नहीं बनेगी, तब तक नेताओं की AC गाड़ियों में बैठकर की जाने वाली चाय–राजनीति की चुस्कियाँ खत्म नहीं होंगी। असल जिम्मेदारी है जमीन पर उतरकर निरीक्षण करना, जनता की आवाज़ समझना और विकास को गति देना।
जर्जर संपर्क मार्ग: भगासा–अहिंयाई–पटेला मार्ग भी बदहाल
कुछ दिन पहले Patti Narendrapur Bhagasa Marg से जुड़े पटेला बाजार–भगासा–अहिंयाई ई-संपर्क मार्ग की हालत भी बेहद खराब पाई गई। गड्ढे, धंसान, टूटी परतें और बरसाती जलभराव के कारण सड़क चलने लायक नहीं बची। ग्रामीणों का आरोप है कि डबल इंजन सरकार के निर्देशों को खुलेआम नज़रअंदाज़ किया जा रहा है।
सड़क की सतह को उंगलियों से रगड़ने भर से बिटुमिन की परत उखड़ जाती है—यह गुणवत्ता की असल तस्वीर है। लोगों का कहना है कि ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत से निम्न गुणवत्ता का कार्य कराया गया, जिसका भुगतान जनता को अपनी जिंदगी से करना पड़ रहा है।
सरकार, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर उठते सवाल
विकास कार्यों का ठोस मूल्यांकन किए बिना केवल रिपोर्टों में “संपूर्ण” और “समुचित” का रटा–रटाया बयान जनता को मंज़ूर नहीं। सड़कें केवल कागज़ों में नहीं, धरातल पर चाहिए। Patti Narendrapur Bhagasa Marg को लेकर उठ रहे सवालों के केंद्र में ये बिंदु प्रमुख हैं—
निर्माण कार्य शुरू क्यों नहीं हो रहा?
- विभागीय निरीक्षण केवल औपचारिकता क्यों?
- जर्जर सड़कों की शिकायतों पर कार्रवाई कब?
- करोड़ों के बजट का उपयोग कहाँ?
- क्षेत्रवासी कहते हैं कि “योजनाएँ आती हैं, घोषणाएँ होती हैं, लेकिन सड़क वहीं रहती है जहां थी—टूटी, धंसी और खतरनाक।”
जनता का सब्र अब जवाब दे रहा है
सड़कों की दुर्दशा के कारण हर रोज़ दुख झेलने वाले किसान, मजदूर और आम नागरिक अब आंदोलन और जन-पत्रकारिता के माध्यम से अपनी आवाज़ उठा रहे हैं। बच्चों की सुरक्षा, व्यापार की सुगमता और आपातकालीन सेवाओं के लिए सड़क अनिवार्य है। बार-बार आश्वासन के बाद भी काम न होने पर लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है।
Patti Narendrapur Bhagasa Marg के उन्नयन की मांग तेज
जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को अब इस जनभावना को समझकर तुरंत कार्ययोजना बनानी होगी। Patti Narendrapur Bhagasa Marg केवल एक सड़क नहीं बल्कि पूरे इलाके की जीवनरेखा है। सड़क बनेगी तो—
- व्यापार बढ़ेगा
- रोजगार सृजित होंगे
- ई-रिक्शा चालकों को राहत
- बच्चों और मरीजों को सुरक्षा
- शाहगंज–पट्टीनरेन्द्रपुर आर्थिक कॉरिडोर को गति
क्षेत्र के लोग अब इंतज़ार में नहीं, कार्रवाई की मांग पर खड़े हैं। क्षेत्र की जनता का एक ही सवाल है कि “कब बनेगा Patti Narendrapur Bhagasa Marg?” विकास का पहिया तभी आगे बढ़ेगा जब सड़कें मजबूत, सुरक्षित और टिकाऊ बनेंगी। अब जरूरत है पारदर्शी कार्रवाई, गुणवत्तापूर्ण निर्माण और जनहित को सर्वोपरि रखने की।