
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित वैश्विक सम्मेलन ‘चिन्मय अमृत महोत्सव’ का उद्घाटन किया।पीएम मोदी ने किया चिन्मय अमृत महोत्सव का उद्घाटन
इस अवसर पर उन्होंने चिन्मय मिशन की आध्यात्मिक और वैचारिक भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि चिन्मय मिशन केवल एक संस्था नहीं, बल्कि एक विचार है। उन्होंने स्वामी चिन्मयानंद के साथ अपनी मुलाकात, उनसे मिली प्रेरणा और उनके आशीर्वाद से जुड़े अनुभव भी साझा किए।प्रधानमंत्री ने कहा कि चिन्मय मिशन की पहचान उसके विचारों और मूल्यों से है। इसका उद्देश्य लोगों तक आध्यात्मिक ज्ञान पहुंचाने के साथ ही जीवन में सकारात्मक बदलाव की प्रेरणा देना है। उन्होंने स्वामी चिन्मयानंद के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनके विचारों ने अनेक लोगों को प्रभावित किया और समाज में आध्यात्मिक चेतना को आगे बढ़ाने का काम किया।
स्वामी चिन्मयानंद से मुलाकात को किया याद
प्रधानमंत्री मोदी ने स्वामी चिन्मयानंद के साथ फरवरी 1993 में बड़ौदा में हुई अपनी मुलाकात का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उस मुलाकात के दौरान उन्हें स्वामीजी के विचारों और मार्गदर्शन को करीब से जानने का अवसर मिला था। प्रधानमंत्री ने इस मुलाकात को अपने जीवन का महत्वपूर्ण अनुभव बताते हुए उनसे जुड़े प्रसंग साझा किए।मोदी ने बताया कि उन्होंने स्वामी चिन्मयानंद को शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद की शताब्दी से जुड़े कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था। यह आयोजन स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक भाषण के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर से जुड़ा था। स्वामी चिन्मयानंद ने निमंत्रण स्वीकार कर लिया था, लेकिन कार्यक्रम से कुछ सप्ताह पहले तीन अगस्त को अमेरिका में उनका निधन हो गया।प्रधानमंत्री ने कहा कि 11 सितंबर को जब वह शिकागो में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए, तब उन्हें स्वामी चिन्मयानंद की अनुपस्थिति का गहरा एहसास हुआ। उन्होंने इस प्रसंग को याद करते हुए बताया कि स्वामीजी के साथ उनकी अंतिम बातचीत में युवाओं की शक्ति बढ़ाने और भारत को मजबूत बनाने जैसे विषयों पर चर्चा हुई थी।
युवाओं की शक्ति और मजबूत भारत पर जोर
प्रधानमंत्री ने स्वामी चिन्मयानंद के साथ हुई अंतिम बातचीत का उल्लेख करते हुए कहा कि उसमें युवाओं की क्षमता और देश के भविष्य को लेकर विचार-विमर्श हुआ था। युवाओं को सशक्त बनाना और उन्हें राष्ट्र निर्माण से जोड़ना इस चर्चा का महत्वपूर्ण हिस्सा था।मोदी के अनुसार, युवाओं की ऊर्जा और क्षमता का सही दिशा में उपयोग देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। मजबूत भारत के निर्माण के लिए समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी जरूरी है। इस दिशा में आध्यात्मिक संस्थाएं भी लोगों को मूल्यों, जिम्मेदारी और सेवा की भावना से जोड़ने का काम कर सकती हैं।
25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन में गुरुजी के आशीर्वाद को किया याद
प्रधानमंत्री ने बताया कि स्वामी चिन्मयानंद से मुलाकात के कुछ वर्षों बाद वह गुजरात के मुख्यमंत्री बने। उन्होंने कहा कि सरकार के प्रमुख के रूप में अपने 25 वर्षों के कार्यकाल के दौरान उन्हें गुरुजी के आशीर्वाद का अनुभव होता रहा है।मोदी ने स्वामी चिन्मयानंद के मार्गदर्शन और उनसे जुड़े अनुभवों को याद करते हुए उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया। उनके संबोधन में आध्यात्मिक प्रेरणा, युवाओं की भूमिका और राष्ट्र निर्माण के विचार प्रमुखता से सामने आए।चिन्मय अमृत महोत्सव के वैश्विक सम्मेलन का आयोजन चिन्मय मिशन की विचारधारा और स्वामी चिन्मयानंद के योगदान को याद करने के उद्देश्य से किया गया। सम्मेलन के माध्यम से आध्यात्मिक विचारों, सामाजिक जिम्मेदारी और देश के भविष्य से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई।

