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SCKA मेरठ का 4 दिवसीय कराटे प्रशिक्षण शिविर सम्पन्न, 40 बच्चों ने सीखी जान बचाने की तकनीकें
मेरठ

SCKA मेरठ का 4 दिवसीय कराटे प्रशिक्षण शिविर सम्पन्न, 40 बच्चों ने सीखी जान बचाने की तकनीकें

Meerut Reporter

वर्तमान समय में आत्मरक्षा सिर्फ एक कला नहीं बल्कि जीवन की आवश्यकता बन चुकी है। इसी उद्देश्य को केंद्र में रखते हुए शोटोकान चिकारा कराटे डू एसोसिएशन (SCKA) मेरठ द्वारा परतापुर स्थित एस.एच.आर.पी इन्क्लूसिव स्कूल में चार दिवसीय आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया, जिसका समापन शुक्रवार को उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ।

एस.एच.आर.पी इन्क्लूसिव स्कूल परतापुर में आयोजित कैंप में बच्चों ने चाकू, डंडे, कपड़े घुटन व दो हमलावरों से बचाव के कौशल सीखे, प्रमाणपत्र देकर किया गया सम्मान

शिविर में करीब 30 से 40 बच्चों ने भाग लिया और उन्हें ऐसे प्रायोगिक कौशल सिखाए गए, जिनका उपयोग किसी भी आकस्मिक परिस्थितियों में स्वयं की रक्षा के लिए किया जा सके। प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षुओं को चाकू के हमले से बचाव, लाठी–डंडे के वार को डिफेंड करना, दुपट्टे या कपड़े से गला घुटने की स्थिति में सुरक्षित निकलना, दो हमलावरों का सामना, नानचाकू व लाठी संचालन जैसी तकनीकों का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया।

शिविर का संचालन SCKA मेरठ के जनरल सेक्रेट्री सन्दई आदित्य नारायण सिंह ने किया। वक्ताओं ने कहा कि छोटी–सी तकनीक और मानसिक सजगता कई बार बड़ी दुर्घटना को रोक सकती है। विशेषकर बच्चों के लिए इस प्रकार का प्रशिक्षण न केवल आत्मविश्वास बढ़ाता है, बल्कि किसी भी खतरनाक स्थिति का सामना करने की क्षमता भी प्रदान करता है।

कार्यक्रम के अंतिम दिन आयोजित समापन समारोह में संस्था के वाइस प्रेसिडेंट श्री हेमंत कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। साथ ही स्कूल की प्रधानाचार्य मिस विशाखा मेम, श्री प्रभाकर गुप्ता एवं श्री प्रवीण कुमार ने सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया। आयोजकों ने कहा कि यह प्रशिक्षण आने वाले समय में बच्चों के व्यक्तिगत विकास और सुरक्षा के प्रति जागरूकता में मील का पत्थर साबित होगा।

समारोह में संस्था के ज्वाइंट सेक्रेट्री सुरज सिंह एवं कोच संसई मीत सिंह का उल्लेखनीय सहयोग रहा। आयोजकों ने बताया कि भविष्य में इस प्रकार के शिविर विद्यालयों व समुदाय स्तर पर और बड़े पैमाने पर आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक बच्चे व अभिभावक आत्मरक्षा के महत्व को समझ सकें और इसे जीवन का हिस्सा बना सकें।

आत्मरक्षा की ये सीख न केवल शरीर को मजबूत बनाती है, बल्कि मन में सुरक्षा और विश्वास का आधार भी स्थापित करती है — और यही इस शिविर की सबसे बड़ी सफलता रही।

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