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Shrimad Bhagwadgita Parayana Mahayagna का भव्य शुभारम्भ Shrimad Bhagwadgita Parayana Mahayagna का भव्य शुभारम्भ की जानकारी देते आयोजक।
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मेरठ। विश्व हिंदू परिषद और विश्व गीता संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को सरस्वती शिशु मंदिर, डी ब्लाक शास्त्रीनगर में श्रीमद्भगवद्गीता पारायण महायज्ञ होगा। जिसमें ज्ञान की गंगा बहेगी। शनिवार को महायज्ञ की सभी तैयारियां पूरी कर ली गईं।

विश्व गीता संस्थान के कार्याध्यक्ष विजय भोला ने बताया कि महायज्ञ कल रविवार को सवेरे आठ बजे से शुरू होगा। 8:30 बजे तक एकत्रीकरण होगा। इसके बाद 11:30 बजे तक संपूर्ण पारायण, 11:30 बजे से 12:30 बजे तक ईश स्तुति एवं यज्ञ, 12:30 बजे से 1:30 बजे तक आशीर्वचन एवं सम्मान तथा 1:30 बजे से 04:00 बजे तक भंडारा होगा।

उन्होंने बताया कि महायज्ञ स्वामी विवेकानंद सरस्वती जी महाराज (गुरुकुल प्रभात आश्रम, मेरठ), महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरि जी महाराज ( जीवन दीप आश्रम, रुड़की) और महंत श्री कमलनयन दास जी महाराज (म. नृत्यगोपालदास, अध्यक्ष श्रीराम तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, मणिराम दास छावनी के उत्तराधिकारी, अयोध्या) के पावन सानिध्य में होगा। विश्व हिंदू परिषद, अखिल भारतीय गोरक्षा प्रमुख खेमचंद शर्मा जी मुख्य अतिथि रहेंगे। मार्गदर्शन और मुख्य वक्ता विहिप के केंद्रीय मंत्री और भारत संस्कृत परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री रहेंगे। विधायक डा.सोमेंद्र तोमर मुख्य यजमान रहेंगे जबकि कार्यक्रम अध्यक्ष विश्व गीता संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीलेश शर्मा रहेंगे। सम्मान अतिथि श्रम कल्याण परिषद के अध्यक्ष राज्यमंत्री पंडित सुनील भराला रहेंगे। विशिष्ट अतिथियों में विनोद भारतीय, नीरज मित्तल, डा.संजय गुप्ता, संजीव अग्रवाल, डा. विनोद अग्रवाल व विजेंद्र अग्रवाल रहेंगे। उन्होंने बताया कि  मेरठ में पिछले पांच साल से श्रीमद्भगवद्गीता पारायण महायज्ञ हो रहा है।

इसका मुख्य उद्देश्य गीता का संदेश घर-घर पहुंचाना है ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी गीता को जान सके और उसका लाभ उठा सके। गीता ही विश्व का एकमात्र ऐसा ग्रंथ है जो मानव धर्म शास्त्र है। उन्होंने बताया कि कोरोना को ध्यान में रखते हुए इस बार महायज्ञ में छह हवन कुंड बनवाये जा रहे हैं। प्रत्येक हवन कुंड पर तीन-तीन यजमान बैठेंगे। विजय भोला ने बताया कि महायज्ञ का मुख्य उद्देश्य समाज एवं भावी पीढ़ी की नींव मजबूत करना है। हर परिवार को गीता का अध्ययन करना चाहिए। आज छोटे परिवार होने के कारण बच्चों में संस्कारों का अभाव होता जा रहा है। गीता से हमें परिवार चलाने और बच्चों को संस्कारवान बनाने की शिक्षा मिलती है।

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