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  • गोदान’ की गूंज सुभारती में: संस्कृति, करुणा और सनातन मूल्यों का सशक्त संदेश

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    जड़ों से जुड़ना ही भविष्य की दिशा- डॉ. शल्या राज

    मेरठः

    स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित मांगल्य ऑडिटोरियम में ‘गोदान’ फिल्म की भव्य स्क्रीनिंग का आयोजन किया गया। गौ-महिमा, भारतीय संस्कृति की गरिमा तथा सनातन मूल्यों के संरक्षण को समर्पित इस फिल्म ने उपस्थित दर्शकों को न केवल भावनात्मक रूप से प्रभावित किया, बल्कि उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों और सामाजिक उत्तरदायित्वों पर गंभीरता से विचार करने के लिए भी प्रेरित किया।
    उल्लेखनीय है कि इसी वर्ष फरवरी में सिनेमाघरों में रिलीज हुई फिल्म ‘गोदान’ के इस विशेष प्रीमियर में मुख्य अतिथि के रूप में वेदपाल (सह विभाग संघचालक, मेरठ विभाग, आरएसएस), विनोद भारती (सह प्रांत संपर्क प्रमुख, मेरठ प्रांत), वरुण गोयल (समाजसेवी एवं प्रदेश महामंत्री, भाजपा युवा मोर्चा, उत्तर प्रदेश), डॉ. नीरज सिंघल (विभाग व्यवस्था प्रमुख, किठौर) एवं विनोद चौधरी (भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता, प्रतिष्ठित उद्योगपति एवं फिल्म निर्माता) एवं विश्वविद्यालय के कार्यकारी अधिकारी प्रो.(डॉ.) कृष्णामूर्ति, प्रो.(डॉ.) रोहित रवींद्र (निदेशक, लोकप्रिय हॉस्पिटल) की गरिमामयी उपस्थिति रही।
    फिल्म ‘गोदान’ केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि करुणा, संस्कृति और सामाजिक यथार्थ को उजागर करने वाली एक सशक्त एवं विचारोत्तेजक प्रस्तुति है। इसमें भारतीय संस्कृति में गौ के आध्यात्मिक, वैज्ञानिक, औषधीय, आर्थिक एवं पर्यावरणीय महत्व को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया है, जो दर्शकों को परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन स्थापित करने की प्रेरणा देती है।

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    कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय की मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो.(डॉ.) शल्या राज ने अपने संबोधन में कहा कि आज के आधुनिक युग में जब हमारी परंपराएँ और मूल्य अनेक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, ‘गोदान’ जैसी फिल्में हमें अपनी जड़ों से जोड़ने और उन्हें संरक्षित रखने की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने इसे केवल एक कलात्मक प्रस्तुति नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और सकारात्मक चिंतन को प्रोत्साहित करने वाला सशक्त माध्यम बताया।
    इस अवसर पर विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो.(डॉ.) प्रमोद कुमार शर्मा ने अपने संदेश में कहा कि “भारतीय संस्कृति की मूल आत्मा हमारी परंपराओं, संवेदनाओं और जीवन मूल्यों में निहित है। ‘गोदान’ जैसी फिल्में न केवल इन मूल्यों को सजीव रूप में प्रस्तुत करती हैं, बल्कि युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने और उन्हें आगे बढ़ाने की प्रेरणा भी देती हैं। शिक्षा संस्थानों की यह जिम्मेदारी है कि वे ऐसे सार्थक प्रयासों को मंच प्रदान करें, जिससे समाज में जागरूकता और सांस्कृतिक चेतना का विस्तार हो।”

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    इस भव्य आयोजन में संचालक की भूमिका का सफल निर्वहन भाषा विभाग की विभागाध्यक्षा डॉ. सीमा शर्मा ने किया वहीं विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डॉ. मुनीश सी. रेड्डी, डॉ. मनोज कपिल, डॉ. आर के जैन, डॉ. एस. सी. तिवारी, डॉ. रेनू मावी, डॉ. विजय वधावन तथा विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, शिक्षकगण, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति रही। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी अतिथियों एवं दर्शकों ने फिल्म की सराहना करते हुए इसे भारतीय संस्कृति, सामाजिक जागरूकता और नैतिक मूल्यों के संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं प्रेरणादायक प्रयास बताया।

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    News Desk

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