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कितनी बेहूदगी की बात है

कितनी बेहूदगी की बात है, पूजा करने के लिए भी नौकर!

प्रेम और पूजा के लिए भी नौकर! उसे भी तुम दूसरे से करवा लेते हो पैसे के बल पर। तो अगर तुमने एक पुजारी को सौ रुपया महीना दिया, और उसने रोज आकर तीन दफा भगवान की पूजा की, तो…