डी. एम. मिश्र की आठ चुनावी ग़ज़लें
1—————- करें विश्वास कैसे सब तेरे वादे चुनावी हैंहक़ीक़त है यही सारे प्रलोभन इश्तहारी हैं। सियासत की ये मंडी है यहाँ भूले से मत जानावही चेहरे यहाँ चलते हैं जो कुख्यात दाग़ी हैं। हवा के साथ उड़ने का ज़रा -सा…
1—————- करें विश्वास कैसे सब तेरे वादे चुनावी हैंहक़ीक़त है यही सारे प्रलोभन इश्तहारी हैं। सियासत की ये मंडी है यहाँ भूले से मत जानावही चेहरे यहाँ चलते हैं जो कुख्यात दाग़ी हैं। हवा के साथ उड़ने का ज़रा -सा…