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  • मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव: ईरान के मिसाइल-ड्रोन हमलों से हड़कंप

    ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों से मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा, अमेरिका और खाड़ी देशों ने बताया खतरनाक बढ़ोतरी। जानिए पूरा मामला

    अमेरिका समेत 6 खाड़ी देशों ने जताई कड़ी आपत्ति, बोले—यह “खतरनाक बढ़ोतरी” और अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन

    Middle East Crisis: क्या हुआ?

    मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ईरान ने हाल ही में कई देशों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए, जिसके बाद अमेरिका और खाड़ी देशों ने इसे “खतरनाक बढ़ोतरी” बताते हुए कड़ी निंदा की है।

    इन हमलों को इजरायल और अमेरिका द्वारा पहले किए गए सैन्य एक्शन के जवाब के रूप में देखा जा रहा है।

    किन देशों ने की निंदा?

    अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट के संयुक्त बयान में अमेरिका के साथ कई खाड़ी देशों ने इन हमलों पर चिंता जताई, जिनमें शामिल हैं:

    • बहरीन
    • जॉर्डन
    • कुवैत
    • कतर
    • सऊदी अरब
    • संयुक्त अरब अमीरात

    इन सभी देशों ने कहा कि ईरान द्वारा संप्रभु क्षेत्रों पर किया गया हमला अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है।

    किन-किन इलाकों पर पड़ा असर?

    इन हमलों का असर कई देशों में देखा गया, जिनमें शामिल हैं:

    • इराक (इराकी कुर्दिस्तान सहित)
    • जॉर्डन, कुवैत, ओमान, कतर
    • सऊदी अरब और यूएई

    रिपोर्ट के मुताबिक, हमलों से नागरिकों की जान खतरे में पड़ी और कई जगहों पर इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान भी पहुंचा।

    अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन

    संयुक्त बयान में कहा गया कि ईरान की यह कार्रवाई न सिर्फ गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सीधा उल्लंघन भी है।

    साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि ईरान ने उन देशों को निशाना बनाया जो सीधे तौर पर किसी संघर्ष में शामिल नहीं थे, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ सकती है।

    एयर डिफेंस और सुरक्षा पर जोर

    सभी देशों ने मिलकर क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने की बात कही। बयान में कहा गया कि:

    • एयर और मिसाइल डिफेंस सिस्टम को और मजबूत किया जाएगा
    • नागरिकों और संप्रभुता की रक्षा के लिए संयुक्त रणनीति अपनाई जाएगी
    • हमलों का मिलकर जवाब देने की तैयारी की जाएगी

    क्यों बढ़ रहा है तनाव?

    विशेषज्ञों के अनुसार:

    • ईरान ने हाल के वर्षों में अपनी मिसाइल और ड्रोन क्षमता काफी बढ़ाई है
    • मिडिल ईस्ट में प्रॉक्सी वॉर और सैन्य टकराव बढ़ रहे हैं
    • अमेरिका के कई देशों में सैन्य बेस होने से रणनीतिक संतुलन प्रभावित हो रहा है

    हालांकि, तेहरान का कहना है कि उसका मिसाइल प्रोग्राम पूरी तरह रक्षात्मक है।

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