निज स्वरूप का एहसास ही परमात्मा से एकाकार की अवस्था: शांतनु महाराज

The realization of one's own true Self is the very state of oneness with the Supreme Being. — Shantanu Maharaj
  • संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
  • सुइथाकला में आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन आचार्य शांतनु जी महाराज की कथा में उमड़ा जन सैलाब
Suresh kannojiya

जौनपुर। सुइथाकला क्षेत्र में आयोजित संगीत्मय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन गुरुवार को भक्तिमय माहौल के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। कथा व्यास आचार्य शांतनु जी महाराज ने अपने प्रवचन में जीवन के सत्य, भक्ति और सदाचार का महत्व बताया।

कथा के दौरान आचार्य शांतनु जी महाराज ने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में भक्ति, सत्य और धर्म के मार्ग का अनुसरण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान की भक्ति से ही जीवन के कष्ट दूर होते हैं और आत्मा को शांति मिलती है। निज स्वरूप का एहसास ही परमात्मा से एकाकार की अवस्था है।

कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने का माध्यम है। कथा के माध्यम से व्यक्ति अपने कर्मों का मूल्य समझता है और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने की प्रेरणा पाता है।

इस अवसर पर मुख्य यजमान इंद्रावती सिंह एवं यमुना प्रसाद सिंह ने कार्यक्रम में पधारे सभी अतिथियों एवं श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आप सभी के सहयोग और उपस्थिति से ही यह आयोजन सफल हो रहा है।

कार्यक्रम के दौरान भजन-कीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा और श्रद्धालु भाव-विभोर होकर कथा का श्रवण करते रहे। मौके पर शाहगंज के विधायक रमेश सिंह, पूर्व ऊर्जा मंत्री शैलेंद्र यादव ललई, कुंवर मृगेंद्र सिंह (शिव बाबा), डॉ. दिनेश सिंह, डॉ रमेश सिंह, डॉ उमेश सिंह, सुशील सिंह (साड़ी संसार), सुरेश पांडेय, दुष्यंत मिश्रा, सर्वेंद्र विक्रम सिंह, वरिष्ठ समाजसेवी संजय सिंह समोधपुर,राम कुमार सिंह, राजेश सिंह लंकेश, विजय प्रकाश तिवारी नेता, आलोक सिंह,पारसनाथ यादव, आदि मौजूद रहे।