Report by : News Desk
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एक अधूरी उड़ान
नन्ही-सी जान दुनिया में आती है,
गिर-गिर कर नन्हे कदमों से चलना सीख जाती है।
पा-पा से ‘पापा’, मा-मा से ‘मम्मा’ कहना सीख रही होती है,
मासूमियत अभी उसकी आँखों में बसती है।
पर दुनिया में कदम रखते ही हवाओं के हाथ लगती है,
और मासूम लड़की दरिंदगी का शिकार बन जाती है।
उसकी उड़ान,
उड़ने से पहले ही खत्म हो जाती है…
बाकी लड़कियों के दिलों में
एक खामोश सा डर छोड़ जाती है।
उसकी चीखें…
उसकी दर्दनाक मौत-यही चीख-चीख कर बताती है कि इंसान…
अब इंसान नहीं रहा।
लेखिका – जिया मित्तल

