भारत की कृषि अर्थव्यवस्था लंबे समय से मानसून, भूजल और अनुमानित आकलनों पर टिकी रही है। ऐसे में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन द्वारा निसार (NISAR) उपग्रह को लेकर साझा की गई जानकारी केवल एक वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं, बल्कि कृषि और जल प्रबंधन के भविष्य की दिशा में बड़ा कदम है। यह भारत और नासा का संयुक्त मिशन है, जो एस-बैंड और एल-बैंड रडार तकनीक के माध्यम से पृथ्वी की सतह का सूक्ष्म अवलोकन करेगा।
निसार का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष है—मिट्टी की नमी का उच्च रिजॉल्यूशन और नियमित आकलन। हर 12 दिनों में पूरे भारत के भू-भाग का 100 मीटर रिजॉल्यूशन डेटा उपलब्ध कराना किसी क्रांति से कम नहीं है। आज भी देश के अनेक हिस्सों में किसान अनुमान के आधार पर सिंचाई करते हैं। कहीं पानी की अधिकता से फसल खराब होती है तो कहीं कमी से उत्पादन घट जाता है। यदि लगभग वास्तविक समय में मिट्टी की नमी की जानकारी उपलब्ध हो, तो सिंचाई की सटीक योजना बन सकेगी और जल संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा।
भारत जैसे विविध जलवायु वाले देश में यह और भी महत्वपूर्ण है। सिंचित गंगा के मैदान, वर्षा-आधारित दक्कन के पठार, अर्ध-शुष्क राजस्थान और अत्यधिक वर्षा वाले पूर्वोत्तर—हर क्षेत्र की मिट्टी की प्रकृति और नमी अलग है। निसार द्वारा विकसित भौतिकी-आधारित एल्गोरिदम इन भिन्नताओं को समझकर विश्वसनीय अनुमान देगा। यह डेटा केवल किसानों के लिए नहीं, बल्कि आपदा प्रबंधन, सूखा पूर्वानुमान और भूजल संरक्षण नीतियों के लिए भी आधार बनेगा।
इस मिशन का एक और महत्वपूर्ण आयाम है—डेटा की लोकतांत्रिक उपलब्धता। राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग केंद्र में तैयार लेवल-4 मिट्टी नमी डेटा को ‘भूनिधि’ पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। इसका अर्थ है कि शोधकर्ता, नीति-निर्माता, कृषि समुदाय और गैर-सरकारी संगठन एक ही स्रोत से प्रमाणिक जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। पारदर्शिता और सुलभता किसी भी तकनीकी पहल को जनोपयोगी बनाती है।
निसार हर 12 दिनों में दो दिशाओं से अवलोकन करेगा, जिससे नमी में होने वाले बदलावों की सटीक निगरानी संभव होगी। यह सुविधा जलवायु परिवर्तन के दौर में और भी अहम हो जाती है, जब मौसम के पैटर्न अनिश्चित होते जा रहे हैं। समय रहते चेतावनी मिलने से किसान सूखे या अधिक वर्षा के जोखिम से पहले तैयारी कर सकेंगे।
अंतरिक्ष विज्ञान को अक्सर दूर की, जटिल और महंगी तकनीक के रूप में देखा जाता है। लेकिन निसार यह साबित करता है कि जब तकनीक का लक्ष्य आम आदमी की जरूरत हो, तो अंतरिक्ष से मिली जानकारी सीधे खेत की मेड़ तक पहुंच सकती है। यह मिशन केवल उपग्रह प्रक्षेपण का आंकड़ा नहीं, बल्कि कृषि आत्मनिर्भरता, जल सुरक्षा और वैज्ञानिक नीति-निर्माण की दिशा में ठोस कदम है।
निसार के माध्यम से भारत ने यह संदेश दिया है कि अंतरिक्ष तकनीक केवल प्रतिष्ठा का विषय नहीं, बल्कि विकास का साधन है। यदि इस डेटा का प्रभावी उपयोग किया गया, तो यह भारतीय कृषि को अधिक सटीक, टिकाऊ और जल-संवेदनशील बनाने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।