E RADIO INDIA

पीएम मोदी की विकास की सियासत

March 17, 2024 | by Pratima Shukla

modijkaj

चुनाव के वक्त सियासी पार्टियों द्वारा सभी तरह के हथकंडे और तरकीब अपनाई जाती हैं। इनमें से कुछ निगेटिव होती हैं और कुछ आश्वासन से जुड़े होते हैं, किन्तु इन दिनों प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जो नईं रणनीति अपनाई है, वह विकसित भारत की तर्ज पर विकास योजनाओं के उद्घाटन को लेकर है। पहले जब विपक्ष सत्ताधारी पार्टी की नीतियों की आलोचना करता था तो वोटरों को एक खास तरह की संतुष्टि महसूस होती थी। इसका फायदा भी विपक्ष को मिलता था, किन्तु अब स्थिति पूरी तरह बदलती दिख रही है।

अब प्रधानमंत्री मोदी देश के विभिन्न पिछड़े क्षेत्रों में एयरपोर्ट, यातायात के अन्य ढांचागत विकास यानि सड़क, पुल, फ्लाई ओवर, रेलवे प्लेटफार्म, विश्वविदृालयों एवं मेडिकल कॉलेज के उद्घाटन के लिए जाते हैं तो उन क्षेत्रों में एक ऐसी प्रतिक्रिया सुनने को मिलती है, जिससे लगता है कि देश में सियासत की दिशा और दशा दोनों ही बदल चुकी है।

देश की सियासत में विभिन्न जातीय गुटबंदी के आधार पर पार्टी की इमेज निखारने की कोशिश करने वालों को यह बात समझ में नहीं आ रही है कि आखिर अब उनके इस सियासी हथकंडे का क्या होगा। जाति के आधार पर बनी पार्टियों में अधिकतर एक खास जाति को आगे करके या फिर किसी धार्मिक समूह को उससे जोड़कर सियासी आधार खड़ा कर लेते थे। देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में समाजवादी एमवाई यानि मुस्लिम-यादव के गठजोड़ को बड़ी सियासी ताकत बनाने की दशकों से कोशिश की जाती रही।यही बात बिहार में भी देखी जा सकती है। वहां भी एमवाई ही चलता है।

लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने एमवाई को खत्म करने की लकीर को छोटी करने के लिए उनसे भी बड़ी विकास की लकीर खींच दी। इससे उन पार्टियों के होश उड़े हैं जो जाति व धर्म का कुनबा जोड़ का राजनीति करते रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा जातीय गठबंधनों को हतोत्साहित करने के लिए निरंतर कोशिश का कारण ही है कि जब एक न्यूज चैनल की एंकर ने अखिलेश से एमवाई के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि एमवाई का मतलब। अखिलेश ने तपाक से जवाब दिया कि एमवाई उनके लिए सिर्फ महिला और युवा हैं।

जो नेता खुलकर एमवाई की बात करते हैं और उन्हें उन्हीं पर भरोसा है, वे भी अब जाति के आधार पर वोट मांगने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। ऐसी जातिवादी पार्टियां यह समझने की कोशिश नहीं कर रही हैं कि भारतीय राजनीति की हकीकत तो जाति है कितु राजनीति का समूचा आधार सिर्फ जाति ही नहीं है।

बहरहाल राजनीति का आधार जितने जल्दी विकास को मान लिया जाए, देश के लिए उतना ही अच्छा साबित होगा। पूर्वी उत्तर प्रदेश जहां विकास के लिए लोग तरस रहे थे या छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्र जहां विकास की बातें सोची भी नहीं जा सकती थीं वह विकास के भाव को महसूस कर रहे हैं तो इसका स्पष्ट संकेत है कि अब विकास की सियासत हर पार्टी के लिए आवश्यक हो जाएगी, क्योंकि इसी से जनगण का कल्याण होगा।

विखंडनवादी जातीय राजनीति देश के लिए कभी भी श्रेयस्कर नहीं हो सकती। वोटर्स भी जाति और धार्मिक उन्माद वाले घिसे-पिटे चूरन को खरीदने के लिए उत्सुक नहीं है। इसलिए देर सबेर सभी पार्टियों को विकास की राजनीति करनी ही पड़ेगी।

यह वीडियो आपको कैसा लगा..? ​यदि अच्छा लगा हो तो लाइक करें तथा कमेंट बॉक्स में अपने सुझाव दें एवं यदि आप इस चैनल में वीडियो पहली बार देख रहे हैं तो चैनल को सब्सक्राइब्स करना न भूलें।

RELATED POSTS

View all

view all