मेडिकल थाना उपनिरीक्षकों पर भ्रष्टाचार और उत्पीड़न के आरोप

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मेरठ, 21 अगस्त। आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री देवेंद्र सिंह राणा ने गुरुवार को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) मेरठ से भेंट कर मेडिकल थाना क्षेत्र में नियुक्त उपनिरीक्षकों के खिलाफ भ्रष्टाचार और उत्पीड़न की शिकायत को लेकर कड़ी कार्रवाई की मांग की।

श्री राणा ने एसएसपी को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि संजय शर्मा पुत्र हरपाल शर्मा, निवासी ग्राम खनौदा, थाना आहार, जिला बुलंदशहर की ओर से दर्ज की गई शिकायत बेहद गंभीर है। संजय शर्मा ने आरोप लगाया है कि मेडिकल कॉलेज थाने में तैनात उपनिरीक्षक बोबी रानी और विपिन कुमार गौतम ने भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग का सहारा लेकर उनसे 25,000 रुपये की अवैध उगाही करने का प्रयास किया।

झूठे मुकदमे का आरोप

शिकायतकर्ता संजय शर्मा ने कहा है कि उनकी गाड़ी (UP13CJ3313) और ड्राइवर के खिलाफ दर्ज एफआईआर (संख्या 0272, दिनांक 21 जुलाई 2025) पूरी तरह झूठी है। यह मुकदमा दबाव बनाकर पैसे वसूलने के उद्देश्य से दर्ज किया गया। दूसरी ओर, रोहन वैद ने दावा किया कि उनकी गाड़ी (UP15DQ8541) को भारी नुकसान हुआ है, जबकि संजय शर्मा ने उस समय की तस्वीरें प्रस्तुत कर यह साबित किया कि केवल साइड का शीशा छुआ था और वाहन को किसी प्रकार की क्षति नहीं हुई।

लगातार दबाव और गाड़ी की जब्ती

संजय शर्मा का आरोप है कि उपनिरीक्षक बोबी रानी और रोहन वैद ने उन्हें लगातार तीन दिन तक फोन कर 25,000 रुपये की मांग की। जब उन्होंने पैसे देने से मना कर अपनी गाड़ी के बीमा क्लेम से नुकसान की भरपाई की पेशकश की, तब उन्हें और उनके ड्राइवर को आठ दिन तक थाने बुलाकर परेशान किया गया। इतना ही नहीं, 31 जुलाई को उनकी गाड़ी जब्त कर ली गई और जमानत प्रक्रिया में जानबूझकर देरी की गई, जिससे चार दिन अतिरिक्त देरी से जमानत हो पाई।

निष्पक्ष जांच की मांग

राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री देवेंद्र सिंह राणा ने एसएसपी मेरठ से मांग की है कि—

एफआईआर संख्या 0272 की जांच क्राइम ब्रांच या भ्रष्टाचार निरोधक शाखा को सौंपी जाए।

मेडिकल थाना उपनिरीक्षक बोबी रानी और विपिन कुमार गौतम के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत कठोर कार्रवाई की जाए।

रोहन वैद द्वारा कथित रूप से जानबूझकर गाड़ी टकराकर झूठा मुकदमा दर्ज कराने की साजिश की भी जांच की जाए।

मेडिकल गेट नंबर-2 के सीसीटीवी फुटेज की जांच मुकदमे में शामिल की जाए।

शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत तस्वीरों का परीक्षण कर यह सत्यापित किया जाए कि वास्तव में वाहन को नुकसान हुआ या नहीं।

पारदर्शिता और न्याय की अपेक्षा

आजाद अधिकार सेना ने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल व्यक्तिगत उत्पीड़न का नहीं बल्कि पुलिस तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार और अवैध उगाही की गंभीर कड़ी का हिस्सा है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि इस प्रकरण में शीघ्र और निष्पक्ष जांच नहीं की गई, तो आंदोलनात्मक कदम उठाए जाएंगे।