वेदव्यास पुरी स्थित मेरठ मंडपम पर किसानों का मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरना लगातार जारी है। बारिश हो या धूप, किसान अपने हक़ को लेकर डटे हुए हैं। शुक्रवार को दिनभर हुई तेज़ बारिश के बावजूद धरना स्थल पर बड़ी संख्या में किसान और महिलाएं मौजूद रहे।
200 से बढ़कर 800 हुए प्रभावित किसान
धरने पर बैठे किसान धर्मपाल सिंह ने बताया कि जब यह अधिग्रहण हुआ और प्रतिकर तय किया गया था, तब किसानों की संख्या लगभग 200 थी। लेकिन समय बीतने के साथ वारिसों की संख्या भी बढ़ती गई और आज इस योजना से लगभग 800 किसान प्रभावित हो चुके हैं।
“सरकार नहीं, एमडीए से लड़ाई”
धरना स्थल पर मौजूद एडवोकेट नरेश ने कहा, “हमारी लड़ाई किसी सरकार से नहीं है। यह केवल किसानों और मेरठ विकास प्राधिकरण के बीच की लड़ाई है। हमें हमारे हक़ से लगातार वंचित किया जा रहा है, लेकिन हम कमजोर नहीं पड़ेंगे। जब तक न्याय नहीं मिलेगा तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।”
किसानों का स्पष्ट संदेश, न विवाद, न राजनीति
धरने पर मौजूद किसान उदयवीर सिंह ने कहा, “हम न तो किसी संगठन के कार्यकर्ता हैं और न ही किसी राजनीतिक दल से जुड़े हैं। यहां मौजूद सभी लोग सिर्फ पीड़ित किसान हैं। हमारी लड़ाई केवल अपने हक़ की है, न कि किसी सत्ता या पार्टी के खिलाफ।” किसानों ने साफ कहा कि वे न तो सरकार से कोई टकराव चाहते हैं और न ही प्राधिकरण से बैर, बस न्यायपूर्ण प्रतिकर की मांग कर रहे हैं।
रुके सभी विकास कार्य
धरने पर बैठे किसानों ने मेरठ विकास प्राधिकरण द्वारा क्षेत्र में किए जा रहे सभी निर्माण कार्य रुकवा दिए हैं। इनमें मेरठ मंडपम का निर्माण, पाइपलाइन बिछाने और पार्क निर्माण जैसे कार्य शामिल हैं। किसानों का कहना है कि जब तक उन्हें उनका हक़ नहीं मिलेगा, तब तक इलाके में कोई विकास कार्य नहीं होने देंगे।
2015 का समझौता बना विवाद की जड़
धरने पर बैठे किसान जगदीश कुमार ने बताया कि वर्ष 2015 में MDA और किसानों के बीच अतिरिक्त प्रतिकर को लेकर समझौता हुआ था। इसमें तय किया गया था कि छोटे किसानों (तीन लाख रुपये तक प्रतिकर पाने वाले) को नगद भुगतान किया जाएगा, जबकि बड़े किसानों को भू-खंड दिए जाएंगे। जगदीश कुमार के अनुसार, “2016 में लगभग 300 चेक किसानों को मिले भी थे, लेकिन इसके बाद से हमें सिर्फ बहकाया जा रहा है। हमारी ज़मीनें MDA बेच रहा है, लेकिन हमें हमारा हक़ नहीं दिया जा रहा।”
न्याय की जंग 10 साल से जारी
धरना दे रहे किसानों का कहना है कि वे पिछले 10 वर्षों से न्याय की जंग लड़ रहे हैं। कई बार अधिकारियों से वार्ता हुई लेकिन परिणाम शून्य रहा। किसानों का आरोप है कि प्राधिकरण ने जमीनें बेच दीं, लेकिन किसानों को मुआवजा और भूखंड देने की शर्तें पूरी नहीं की गईं।
धरना स्थल पर मौजूद किसानों ने साफ कहा कि जब तक उन्हें उनका हक़ नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा और क्षेत्र के विकास कार्यों पर रोक बनी रहेगी।
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