“बीमारियों से बचने का मंत्र मिला मेरठ में! सुभारती विश्वविद्यालय में योग और प्राकृतिक चिकित्सा पर बड़ा जागरूकता कार्यक्रम”
मेरठ।
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के केरल वर्मा सुभारती कॉलेज ऑफ साइंस द्वारा “जीवन शैली विकार एवं प्राकृतिक चिकित्सा और योग की भूमिका” विषय पर एक प्रभावशाली जागरूकता व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम छात्रों एवं संकाय सदस्यों के लिए आयोजित किया गया, जिसमें स्वस्थ जीवन शैली के महत्व पर विशेष बल दिया गया। यह व्याख्यान ऑफलाइन मोड में महर्षि अरविंद सुभारती कॉलेज एवं अस्पताल, प्राकृतिक चिकित्सा एवं योगिक विज्ञान के सहयोग से संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रो. (डॉ.) रविन्द्र कुमार जैन, डीन, केरल वर्मा सुभारती कॉलेज ऑफ साइंस, मुख्य अतिथि वक्ता एवं सभी विभागाध्यक्षों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर डॉ. श्रुति बैद, सहायक प्राध्यापक (BNYS), एम.डी. (पोषण एवं आहार विज्ञान) ने सम्मेलन कक्ष में अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रा रहीं डॉ. बैद ने पोषण, प्राकृतिक चिकित्सा एवं जीवन शैली आधारित रोग प्रबंधन के क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता साझा की। अपने संबोधन में उन्होंने वर्तमान समय में तेजी से बढ़ रहे जीवन शैली विकारों जैसे मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप एवं तनाव संबंधी समस्याओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि असंतुलित खान-पान, निष्क्रिय जीवन शैली, शारीरिक गतिविधियों की कमी एवं बढ़ता मानसिक तनाव इन बीमारियों के प्रमुख कारण हैं, जिनसे समय रहते बचाव अत्यंत आवश्यक है। डॉ. बैद ने प्राकृतिक चिकित्सा को एक समग्र एवं औषधि-रहित उपचार पद्धति बताते हुए कहा कि यह शरीर की स्वाभाविक रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक है। उन्होंने संतुलित आहार, डिटॉक्सिफिकेशन एवं जीवन शैली में सुधार जैसे उपायों को अपनाने पर जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने योग की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि नियमित योग अभ्यास न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करता है, बल्कि मानसिक संतुलन एवं भावनात्मक स्थिरता भी प्रदान करता है। योग तनाव प्रबंधन, एकाग्रता में वृद्धि तथा समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने यह भी बताया कि प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग का संयुक्त अभ्यास जीवन शैली विकारों की रोकथाम एवं प्रबंधन दोनों में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो सकता है। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को स्वस्थ जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया तथा प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग को अपने दैनिक जीवन में शामिल करने हेतु प्रोत्साहित किया गया। यह सत्र अत्यंत ज्ञानवर्धक, सहभागितापूर्ण एवं प्रेरणादायक रहा, जिसने आधुनिक जीवन की व्यस्तता के बीच समग्र स्वास्थ्य एवं निवारक देखभाल के महत्व को समझने का उत्कृष्ट अवसर प्रदान किया।








