देश में करोड़ों लोग जिस पर भरोसा करते हैं… अगर वही बिना जांच के ऐसी बात कह दे जिससे देश की नीतियों और संस्थाओं पर सवाल उठ जाएं… तो क्या सिर्फ एक माफी काफी है? या फिर ऐसे प्रभावशाली लोगों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए?
देश के चर्चित यूट्यूबर सौरव जोशी ने पहले दावा किया कि E20 पेट्रोल की वजह से उनकी करोड़ों की लग्जरी कार की माइलेज तेजी से गिर गई है। वीडियो वायरल हुआ, लाखों लोगों ने उसे सच मान लिया और देश की नई ईंधन नीति पर सवाल उठने लगे। लेकिन कुछ ही घंटों बाद तस्वीर बदल गई।
मर्सिडीज सर्विस सेंटर की जांच में सामने आया कि समस्या E20 पेट्रोल नहीं, बल्कि कार के इंजन में तकनीकी खराबी थी। इसके बाद सौरव जोशी ने सोशल मीडिया पर माफी मांगते हुए अपना दावा वापस ले लिया और संबंधित हिस्सा भी हटा दिया।
लेकिन सवाल यह है कि जब करोड़ों लोगों तक गलत जानकारी पहुंच गई, तब उसका नुकसान कौन भरेगा? क्या सिर्फ एक पोस्ट लिख देने से देश की छवि को पहुंची कथित क्षति की भरपाई हो जाती है? क्या इतने बड़े प्लेटफॉर्म पर बिना तथ्यों की पुष्टि किए देश









