
- मेरठ दक्षिण पर दावेदारों की भरमार
- कांग्रेस के कई नेता लगे है कतार में
- दिल्ली तक दौड़ लगा रहे है दावेदार
- कांग्रेस और सपा में अघोषित द्वंद्व
मेरठ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की आहट अब धीरे-धीरे सुनाई देने लगी है। वैसे तो मेरठ जिले की सातों विधानसभा सीटों के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों में मारामारी रहती है, लेकिन इस बार मेरठ दक्षिण सीट कांग्रेस और सपा के लिए काफी महत्वपूर्ण है। दोनों ही दल इस सीट पर अपनी अपनी दावेदारी जाता रहे हैं और कांग्रेस के लिए यह हॉट सीट की तरह हो गई है।
दरअसल, इस सीट पर जहां एक ओर मुस्लिम और दलित मतों के सहारे सपा और बसपा मजबूत चुनौती पेश करती हैं, वहीं भाजपा अपने कोर मतदाताओं वैश्य, जैन, ठाकुर, ब्राह्मण और गैर यादव ओबीसी के ध्रुवीकरण के बल पर इस सीट पर बढ़त बनाए रखना चाहती हैं। मेरठ दक्षिण सीट पर मुस्लिम वोटरों की संख्या बहुतायत में है। इस सीट पर शहर की ज़ाकिर कॉलोनी, जैदी फार्म, जैदी सोसायटी और हापुड़ रोड का बड़ा हिस्सा तथा खरखौदा के कई मुस्लिम बाहुल्य गांव मेरठ दक्षिण में आते हैं। इसी के चलते स्थानीय कांग्रेसी चाहते हैं कि दक्षिण सीट कांग्रेस के खाते में आए। कई स्थानीय कांग्रेसियों ने तो हाईकमान और एआईसीसी की परिक्रमा भी शुरू कर दी है। मुस्लिम चेहरों में डॉ. यूसुफ कुरैशी सबसे दमदार दावेदारी पेश कर रहे हैं। इसके अलावा गैर मुस्लिम चेहरों में रंजन शर्मा, बबीता गुर्जर, हेमंत प्रधान और धूम सिंह गुर्जर भी पीछे नहीं है। इसके अलावा ज़ाहिद अंसारी भी हसरतें पाले बैठे हैं। मेरठ दक्षिण सीट पर मुसलमानों के अलावा दलित, त्यागी और गुर्जरों की भी अच्छी खासी संख्या है। पिछले चुनाव में भाजपा के डॉ. सोमेंद्र तोमर को जहां 1,29,667 वोट मिले थे, वहीं सपा के आदिल चौधरी को 1,21,725 वोट हासिल हुए थे। हालांकि इन्हीं आंकड़ों के बल तथा पीडीए फार्मूले के तहत सपा भी इस सीट पर दमदार दावा ठोक रही है। इस सीट पर डेढ़ लाख के आसपास मुस्लिम मत है, जबकि दलित मतों की संख्या लगभग 1 लाख है। इसके अलावा ब्राह्मण वोट भी लगभग 50 हजार हैं, जबकि वैश्य वोट 40 हजार के आसपास हैं। अगर अन्य जातियों की बात करें तो उनमें जाट, गुर्जर, सैनी, प्रजापति, पाल, यादव, जैन और सिख वोट भी लगभग 10 हजार से 25 हजार के बीच है जो किसी भी प्रत्याशी का गणित बिगड़ने की क्षमता रखते हैं।







