यूपी में तीसरे मोर्चे की सुगबुगाहट, ओवैसी-चंद्रशेखर-मौर्य की चर्चा

WhatsApp Image 2026 09 25 at 3.30.57 PM
e radio india meerut
  • एनडीए और सपा-कांग्रेस गठबंधन के बीच नए राजनीतिक समीकरणों पर नजर
  • औपचारिक घोषणा अभी बाकी, पल्लवी पटेल के नाम पर भी चर्चा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले तीसरे राजनीतिक मोर्चे की संभावनाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है। आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के एक साथ आने की अटकलें चल रही हैं। हालांकि, अभी किसी औपचारिक गठबंधन की घोषणा नहीं हुई है।

मौजूदा समय में प्रदेश की राजनीति में भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए और समाजवादी पार्टी-कांग्रेस का गठबंधन प्रमुख राजनीतिक खेमे हैं। इनके बीच तीसरे विकल्प को लेकर चल रही कवायद में कई क्षेत्रीय दलों के नाम सामने आ रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक अपना दल (कमेरावादी) की प्रमुख पल्लवी पटेल को भी संभावित गठबंधन में शामिल किए जाने पर चर्चा है।

आजाद समाज पार्टी के प्रवक्ता युसूफ अंसारी के हवाले से बताया गया है कि ओवैसी की पार्टी गठबंधन के संभावित विकल्पों में शामिल है और विभिन्न स्तरों पर बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि अंतिम फैसला पार्टी की कोर कमेटी और वरिष्ठ नेता बहुजन समाज के हितों को ध्यान में रखकर करेंगे।

इस बीच ओवैसी ने भी उत्तर प्रदेश में गठबंधन को लेकर अपना रुख सार्वजनिक किया है। उन्होंने कहा है कि एआईएमआईएम समान विचारधारा वाले दलों के साथ गठबंधन के लिए तैयार है और पार्टी दो अक्टूबर तक अपने गठबंधन को लेकर निर्णय की घोषणा कर सकती है।

तीसरे मोर्चे की चर्चा नई नहीं है। 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भी पीडीएम गठबंधन का प्रयोग हुआ था। वहीं 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले ओमप्रकाश राजभर, शिवपाल यादव, चंद्रशेखर आजाद और ओवैसी के साथ आने की चर्चा हुई थी, लेकिन चुनाव के दौरान यह राजनीतिक समीकरण कायम नहीं रह सका।

इस बार चंद्रशेखर आजाद और स्वामी प्रसाद मौर्य के बीच मुलाकात तथा ओवैसी की गठबंधन संबंधी सक्रियता के बाद चर्चाओं को नया आधार मिला है। जुलाई में दोनों नेताओं की मुलाकात की भी रिपोर्ट सामने आई थी।

रिपोर्टों के अनुसार संभावित गठबंधन की औपचारिक घोषणा 27 सितंबर को लखनऊ में किए जाने की चर्चा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में आने वाले दिनों में दलों के बीच सीटों और गठबंधन के स्वरूप को लेकर होने वाली बातचीत पर नजर रहेगी।