Report by : News Desk
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14 अप्रैल: आंबेडकर जयंती पर सियासी महासंग्राम! मोदी से अखिलेश-मायावती तक, दलित वोट बैंक पर सबकी नजर
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मेरठ/लखनऊ: 14 अप्रैल को देशभर में मनाई जाने वाली डॉ. भीमराव आंबेडकर जयंती इस बार उत्तर प्रदेश की राजनीति में बेहद खास होने जा रही है। 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले यह दिन सियासी दलों के लिए एक बड़ा मंच बन चुका है, जहां हर पार्टी दलित वोट बैंक को साधने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।

नरेंद्र मोदी से लेकर अखिलेश यादव, मायावती और चंद्रशेखर आज़ाद तक—सभी नेताओं ने इस दिन के लिए अलग-अलग रणनीति तैयार की है।

भाजपा: सहारनपुर से ‘ऑपरेशन दलित’ का बड़ा संदेश

भारतीय जनता पार्टी ने इस बार आंबेडकर जयंती को एक बड़े राजनीतिक इवेंट में बदलने की तैयारी कर ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 अप्रैल को सहारनपुर में एक विशाल रैली को संबोधित कर सकते हैं।

यह रैली सहारनपुर के बिहारीगढ़ इलाके में प्रस्तावित है, जहां दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के साथ सियासी संदेश भी दिया जाएगा।

पिछले दो महीनों में यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री की तीसरी बड़ी रैली होगी। इससे पहले वे मेरठ में रैपिड रेल और मेट्रो तथा जेवर एयरपोर्ट के कार्यक्रम में शामिल हो चुके हैं।

इसके साथ ही भाजपा 7 से 12 अप्रैल तक ‘गांव चलो, बस्ती चलो’ अभियान चलाकर दलित बस्तियों में पहुंचने की रणनीति पर काम कर रही है।

कांग्रेस: 75 जिलों में संविधान के नाम पर पहुंच

कांग्रेस ने भी इस मौके को गंभीरता से लिया है। पार्टी ने राज्य के सभी 75 जिलों में कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया है।

कांग्रेस इस दिन डॉ. भीमराव आंबेडकर के साथ-साथ बाबू जगजीवन राम जैसे दलित नेताओं को याद करते हुए खुद को सामाजिक न्याय का असली पक्षधर साबित करने की कोशिश करेगी।

पार्टी भाजपा सरकार पर दलित विरोधी नीतियों का आरोप लगाते हुए अपने पक्ष में माहौल बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।

बसपा: लखनऊ में शक्ति प्रदर्शन, कोर वोट बैंक पर फोकस

बहुजन समाज पार्टी इस बार आंबेडकर जयंती को शक्ति प्रदर्शन के रूप में मनाने जा रही है।

मायावती के नेतृत्व में लखनऊ में राज्य के सभी 75 जिलों और 18 मंडलों के कार्यकर्ता जुटेंगे।

बसपा का मकसद अपने पारंपरिक दलित वोट बैंक को एकजुट करना और यह संदेश देना है कि उनके हितों की असली संरक्षक वही है।

आज़ाद समाज पार्टी: ‘समानता दिवस’ के जरिए बहुजन एकता

चंद्रशेखर आज़ाद की अगुवाई वाली आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) इस दिन को ‘समानता दिवस’ के रूप में मनाएगी।

पार्टी पूरे प्रदेश में रैलियां, गोष्ठियां और जनसभाएं आयोजित करेगी, जिनका मुख्य फोकस दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्गों को जोड़ना होगा।

“संवैधानिक अधिकार बचाओ, भाईचारा बनाओ” जैसे नारों के जरिए पार्टी 2027 के चुनावों के लिए जमीन मजबूत करने में जुटी है।

सपा: गांव-गांव ‘संविधान बचाओ’ अभियान

समाजवादी पार्टी भी पीछे नहीं है।

अखिलेश यादव ने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि आंबेडकर जयंती को गांव-गांव तक पहुंचाया जाए।

पार्टी ‘संविधान बचाओ’ जन-जागरण अभियान चलाकर सामाजिक न्याय और एकता का संदेश देने की कोशिश करेगी।

आंबेडकर जयंती बनी 2027 की सियासी लॉन्चपैड

इस बार आंबेडकर जयंती केवल श्रद्धांजलि का दिन नहीं, बल्कि 2027 विधानसभा चुनावों का शुरुआती रण बनती नजर आ रही है।

हर दल अपने-अपने तरीके से दलित वोट बैंक तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में 14 अप्रैल का दिन यह तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है कि आने वाले चुनावों में किसकी रणनीति कितनी असरदार साबित होगी।

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