
मेरठ। शनिवार को सीजेपी द्वारा दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन के चलते मेरठ में पुलिस-प्रशासन अलर्ट पर रहा। सिवाया और काशी टोल प्लाजा सहित जिले की सभी सीमाओं की नाकेबंदी करते हुए पुलिस ने छावनी में तब्दील कर दिया। इस दौरान दिल्ली की तरफ जाने वाले वाहनों को रोककर उनकी सघन तलाशी ली गई। जंतर-मंतर पर धरने में शामिल हो रहे भाकियू कार्यकर्ताओं को रोके जाने पर किसान काशी टोल प्लाजा पर धरना देकर बैठ गए। वहीं भाकियू चंडूनी के प्रदेश महासचिव को रोके जाने पर भी जमकर हंगामा हुआ। पुलिस ने जैसे-तैसे सभी को समझा बुझाकर वापस लौटाया। उधर, सिवाया टोल प्लाजा पर भी सघन चेकिंग के बाद ही वाहन चालकों को आगे बढ़ने की अनुमति दी गई।

बताते चलें कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाए जाने की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी ने शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन का ऐलान किया था। जिसके चलते शनिवार की सुबह ही मेरठ में पुलिस-प्रशासन ने जिले की सभी सीमाओं को सील करते हुए नाकेबंदी कर दी। सिवाया टोल प्लाजा और काशी टोल प्लाजा पर भारी मात्रा में फोर्स तैनात कर दी गई। दिल्ली की तरफ जाने वाले वाहन चालकों से पूछताछ और वाहनों की तलाशी लेने के बाद ही उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति दी गई। किसी भी राजनैतिक दल का झंडा लगे वाहन पुलिस के निशाने पर रहे। दिल्ली जा रहे भाकियू कार्यकर्ताओं के वाहनों को पुलिस ने काशी टोल प्लाजा पर रोक लिया। जिसके चलते हंगामा करते हुए किसान टोल प्लाजा पर धरना देकर बैठ गए और हुक्का गुड़गुड़ाना शुरू कर दिया। इसी बीच भारतीय किसान यूनियन चंडूनी के प्रदेश महासचिव कपिल पूनिया को भी काफिले के साथ दिल्ली जाते हुए पुलिस ने काशी टोल प्लाजा पर ही रोक लिया। इस दौरान कपिल पूनिया की पुलिस अधिकारियों के साथ तीखी नोंक-झोंक हुई। कपिल ने आरोप लगाया कि सत्ता के दबाव में पुलिस भी वोट चोरों का साथ दे रही है। काफी देर चले हंगामे के बाद पुलिस ने सभी लोगों को समझा कर वापस लौटाया।
