
CCSU 38th Convocation में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय का 38वां दीक्षांत समारोह बुधवार को गरिमामय माहौल में आयोजित हुआ, जहां उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए। समारोह में कुल 199 प्रतिभाशाली छात्रों को विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया। इनमें एक कुलाधिपति स्वर्ण पदक, एक पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा स्वर्ण पदक, दो चौधरी चरण सिंह स्मृति प्रतिभा पुरस्कार, 62 प्रायोजित स्वर्ण पदक और 133 कुलपति स्वर्ण पदक शामिल रहे।
दीक्षांत समारोह केवल मेधावियों के सम्मान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अपने संबोधन में उच्च शिक्षा, शोध कार्य, युवाओं में बढ़ते नशे के खतरे और अभिभावकों की जिम्मेदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत में अभी भी शोध कार्य अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाया है और विश्वविद्यालयों को इस दिशा में गंभीर प्रयास करने होंगे।
CCSU 38th Convocation में 199 मेधावी विद्यार्थियों को मिले स्वर्ण पदक
38वें दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय परिसर में उत्साह और गौरव का वातावरण देखने को मिला। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विभिन्न संकायों के उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को मंच पर आमंत्रित कर स्वर्ण पदक और पुरस्कार प्रदान किए।
सम्मानित होने वाले विद्यार्थियों में कुलाधिपति स्वर्ण पदक, पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा स्वर्ण पदक, चौधरी चरण सिंह स्मृति प्रतिभा पुरस्कार, प्रायोजित स्वर्ण पदक और कुलपति स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राएं शामिल रहे। समारोह के दौरान विद्यार्थियों और उनके परिजनों के चेहरे पर उपलब्धि की खुशी साफ दिखाई दी।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान देने की जिम्मेदारी भी है। उन्होंने विद्यार्थियों से शोध, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों का उद्देश्य केवल परीक्षा आयोजित करना नहीं, बल्कि ऐसे युवाओं का निर्माण करना है जो भविष्य की चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत कर सकें।
CCSU 38th Convocation में शोध कार्य को लेकर राज्यपाल ने जताई चिंता
अपने संबोधन के दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने देश में शोध कार्य की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारत में अभी भी रिसर्च के क्षेत्र में अपेक्षित प्रगति नहीं हो रही है और विश्वविद्यालयों को इस दिशा में अधिक सक्रिय होने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी देश की प्रगति उसके शोध, नवाचार और वैज्ञानिक सोच पर निर्भर करती है। यदि विश्वविद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा तो उसका लाभ समाज, उद्योग और राष्ट्र निर्माण सभी क्षेत्रों को मिलेगा।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों से अनुसंधान आधारित शिक्षा को प्राथमिकता देने की अपील करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि नए विचारों और समस्याओं के समाधान की दिशा में भी कार्य करना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी पूंजी है और यदि उसे सही दिशा मिले तो भारत वैश्विक स्तर पर शोध और नवाचार में भी अग्रणी भूमिका निभा सकता है।
CCSU 38th Convocation में युवाओं को नशे से दूर रहने की दी सीख
दीक्षांत समारोह के दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि नशा किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। जब कोई युवा नशे की गिरफ्त में आता है, उसी दिन से उसके परिवार के सपनों को गहरा आघात पहुंचता है।
उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने अब तक लगभग 15 विश्वविद्यालयों के छात्रावासों का निरीक्षण किया है। निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर हॉस्टलों के बाहर शराब की बोतलें पड़ी मिलीं। उन्होंने कहा कि बाहर से आने वाले भोजन के साथ कई बार नशीले पदार्थ भी छात्रों तक पहुंच रहे हैं।
राज्यपाल ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में छात्रावास प्रबंधन और विश्वविद्यालय के कुलपतियों को तस्वीरें भी दिखाईं और आवश्यक सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज और अभिभावकों की भी जिम्मेदारी है कि वे युवाओं को नशे की लत से बचाने के लिए जागरूक रहें।
उन्होंने भावुक शब्दों में कहा कि गांवों में माता-पिता बारिश और धूप में खेतों में मेहनत करते हैं। वे यह सोचकर खुश होते हैं कि उनका बेटा या बेटी हॉस्टल में पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन कई बार उन्हें यह जानकारी नहीं होती कि उनका बच्चा नशे की गिरफ्त में फंस चुका है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से छात्रों के लिए स्वस्थ, सुरक्षित और अनुशासित शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।
38वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल का यह संदेश केवल पुरस्कार वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, अनुसंधान की आवश्यकता, सामाजिक जिम्मेदारी और युवाओं को नशामुक्त रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अपील के रूप में सामने आया। विश्वविद्यालय के इस आयोजन ने एक ओर मेधावी विद्यार्थियों की उपलब्धियों का सम्मान किया तो दूसरी ओर शिक्षा व्यवस्था से जुड़े उन महत्वपूर्ण मुद्दों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया, जिन पर आने वाले समय में गंभीरता से कार्य करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।







