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बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य: 17 साल की अर्शिया की पहल, ताकि डिप्रेशन का शिकार होने से बच सके ‘देश का भविष्य’

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  • नई दिल्ली

कम उम्र में ही बच्चों के डिप्रेशन का शिकार होना, मौजूदा समय की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसके लिए कई कारणों को जिम्मेदार मानते हैं। कोरोना जैसी महामारी ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है।

बच्चों को ऐसे ही समस्याओं से मुक्त कराने के लिए 17 साल की अर्शिया गौड़ ने बड़ा अभियान छेड़ रखा है। अर्शिया, देशभर में छोटे बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता फैला रही हैं।

इतना ही नहीं वह पढ़ाई-लिखाई से वंचित बच्चों की मदद करके उनके जीवन को नई दिशा देने का भी प्रयास कर रही हैं। बच्चों का भविष्य, सुविधाओं की कमी में खराब न हो जाए, इसके लिए प्रयासरत अर्शिया धनराशि इकट्ठा करके ऐसे ही जरूरतमंद बच्चों की मदद के लिए प्रयास में जुटी हैं।

अर्शिया खुद बचपन में डिप्रेशन का शिकार रह चुकी हैं। बचपन में अधिक वजन होने के कारण बच्चे उन्हें चिढ़ाते थे। इस समस्या ने उनकी दिमाग पर इतना गंभीर असर डाला कि वह काफी परेशान रहने लगीं और एक समय के बाद वह डिप्रेशन की शिकार हो गईं।

ऐसी समस्या किसी और को न झेलनी पड़े इसी को लेकर अर्शिया लगातार बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैला रही हैं। अर्शिया कहती हैं, आमतौर पर इस तरह की समस्या पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता है, लेकिन यह बेहद ही गंभीर विषय है।

अर्शिया कहती हैं, माता-पिता को बच्चों के व्यवहार पर विशेष ध्यान रखना चाहिए। इसमें किसी भी तरह के बदलाव को गंभीरता से लिया जाना आवश्यक है। डिप्रेशन, एंग्जाइटी जैसी समस्याओं से बच्चों को समय रहते निकालने के प्रयास किए जाने आवश्यक हैं,

वरना इसका भविष्य पर गहरा असर पड़ सकता है। अर्शिया अब तक 500 से अधिक डिप्रेशन के शिकार बच्चों की मदद कर चुकी हैं, वह लोगों से भी इस काम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील कर रही हैं।

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Neha Singh

नेहा सिंह इंटर्न डिजिटल पत्रकार हैं। अनुभव की सीढ़ियां चढ़ने का प्रयत्न जारी है। ई-रेडियो इंडिया में वेबसाइट अपडेशन का काम कर रही हैं। कभी-कभी एंकरिंग में भी हाथ आजमाने से नहीं चूकतीं।

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