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दरोगा जी की बाइक पर बैठा कानून—तीन सवारी, जीरो चालान!
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Deepak Prami E Radio India Reporter Sultampur

सुल्तानपुर। मित्र पुलिस का नया कारनामा सामने आया है। ट्रैफिक नियमों का पाठ पढ़ाने वाले दरोगा जी खुद ही किताब के पन्ने फाड़ते नज़र आए। मामला कलेक्ट्रेट परिसर का है, जहां दरोगा जी अपनी बाइक पर दो महिलाओं को बैठाकर कोर्ट आ धमके।


📌 नियम किताब में, सवारी बाइक पर तीन

कानून कहता है—बाइक पर तीन सवारी नहीं बैठ सकती। मगर दरोगा जी का कहना शायद कुछ और है। “हमारा बाइक, हमारी सवारी, और कानून हमारी जेब में।”


📌 महिला आरक्षी कहाँ गई?

नियम ये भी कहता है कि महिला, चाहे आरोपी हो या पीड़िता, पूछताछ व पेशी के वक्त महिला आरक्षी की मौजूदगी ज़रूरी है। मगर यहां महिला आरक्षी तो नदारद थीं, और दरोगा जी ने ही जिम्मेदारी संभाल ली।


📌 आम जनता के लिए चालान, दरोगा जी के लिए सम्मान?

गांव में कोई युवक ट्रिपलिंग करता पकड़ा जाए तो 2000 रुपये का चालान तुरंत। मगर दरोगा जी तीन सवारी लेकर कोर्ट पहुंच जाएं तो खामोशी छा जाती है। आखिर ये दोहरा कानून क्यों?


📌 दरोगा जी की फर्राटा स्टाइल

गवाहों के मुताबिक दरोगा जी बेफिक्र होकर फर्राटे भर रहे थे। न उन्हें ट्रैफिक पुलिस का डर, न नियम-कायदों की चिंता। शायद इसीलिए लोग तंज कस रहे हैं—
“जहां दरोगा जी चलाएं बाइक, वहां ट्रैफिक नियम खुद साइड हो जाते हैं।”


📌 जनता के मन का सवाल

क्या इस मामले पर कोई कार्यवाही होगी या फिर यह भी फाइलों में दब जाएगा?
क्या पीड़िता ऐसे ही ‘दो सवारियों’ के बीच पिसती रहेगी?
या फिर दरोगा जी का विशेषाधिकार ही अंतिम कानून है?


फिलहाल जनता यही कह रही है—
“नियम तो आम आदमी के लिए हैं, वर्दीवालों के लिए सड़क तो भी लाल कालीन है

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