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    Diabetic Retinopathy Treatment in Meerut: मेडिकल कालेज में शुरू होगा डायबिटिक रेटिनोपैथी क्लीनिक
    • जांच के लिये हाईटेक मशीनों की खरीद के साथ रेटिना विशेषज्ञ की भी होगी नियुक्ति

    Diabetic Retinopathy Treatment in Meerut: लाला लाजपत राय मेडिकल कालेज में जल्द ही डायबिटिक रेटिनोपैथी क्लीनिक शुरू होगा। इसकी तैयारी शुरू हो गयी है। इसके लिये मेडिकल कालेज को बजट उपलब्ध कराया जाएगा। प्रदेश के आर्थिक बजट में इसकी घोषणा की गयी है। रेटिनोपैथी क्लीनिक खुलने से बड़ी संख्या में मेरठ और आसपास के इलाके के लोगों को उपचार की सुविधा मिलेगी।

    गौरतलब है कि मेडिकल कालेज के पूर्व प्राचार्य और वर्तमान अपर निदेशक चिकित्सा एवं शिक्षा डाँ आरसी गुप्ता इसके लिए प्रयासरत थे। उन्होंने वित्त मंत्री सुरेश खन्ना से इसकी शिफारिश की थी। रेटिनोपैथी क्लीनिक खुलने पर शुगर ;डायबिटीजद्ध के मरीजों की आंखों की बीमारी रोकने के लिये स्क्रीनिंग और उपचार की सुविधा मिलेगी। क्लीनिक के लिये हाईटेक मशीन खरीदी जाएगी साथ ही एक रेटिना विशेषज्ञ चिकित्सक की तैनाती की जाएगी।

    Diabetic Retinopathy Treatment in Meerut: प्राचार्य ने क्या कहा

    मेडिकल कालेज के प्राचार्य डाँ ज्ञानेन्द्र कुमार ने बताया बदलती जीवन शैली के कारण बड़ी संख्या में शुगर के शिकार हो रहे मरीजों के लिये बड़ी सौगात होगी। उन्होंने बताया इस साल इसकी शुरुआत हो जाएगी। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोग शुगर की चपेट में हैं। 10.15 प्रतिशत लोग प्री डायबिटिक स्थिति में हैं।

    आमतौर पर शुगर की बीमारी के चलते पांच साल बाद रेटिना “आंख का पर्दा” पर असर पड़ना शुरू हो जाता है। उन्होंने बताया मेडिकल कालेज अस्पताल में हर महीने रेटिना से संबंधित बीमारी को लेकर 200 से 300 मरीज आते हैं। शुगर के मरीजों की आंखों की स्क्रीनिंग कर इलाज किया जाना बेहद जरूरी है। मेडिकल कालेज के नेत्र रोग विशेषज्ञ डाण् लोकेश कुमार ने बताया अनियमित जीवन शैली से कम उम्र में ही लोग डायबिटीज के शिकार हो जाते हैं।

    Diabetic Retinopathy Treatment in Meerut: डायबिटिक रेटिनोपैथी

    डायबिटिक रेटिनोपैथी क्लीनिक में आंखों की बीमारी का इलाज किया जाता है। लम्बे समय तक डायबिटीज रहने से पीड़ित व्यक्ति के रेटिना, आंख का पर्दाद् प्रभावित होने का खतरा बना रहता है । इस बीमारी में रेटिना को रक्त पहुंचाने वाली बेहद पतली नसें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। समय पर इलाज कराने से अंधेपन के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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    Pratima Shukla

    प्रतिमा शुक्ला डिजिटल पत्रकार हैं, पत्रकारिता में पीजी के साथ दो वर्षों का अनुभव है। पूर्व में लखनऊ से दैनिक समाचारपत्र में कार्य कर चुकी हैं। अब ई-रेडियो इंडिया में बतौर कंटेंट राइटर कार्य कर रहीं हैं।
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