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Sultanpur: सड़क सुरक्षा माह में नियमों की अनदेखी, प्रशासन खुद कटघरे में Sultanpur: सड़क सुरक्षा माह में नियमों की अनदेखी, प्रशासन खुद कटघरे में
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Sultanpur: सड़क सुरक्षा माह में नियमों की अनदेखी, प्रशासन खुद कटघरे में

तहसीलदार सदर की गाड़ी का प्रदूषण प्रमाणपत्र समाप्त, फिर भी सड़कों पर फर्राटा

सुलतानपुर। जिले में सड़क सुरक्षा माह चल रहा है और आम नागरिकों को हेलमेट, सीट बेल्ट, प्रदूषण प्रमाणपत्र और वाहन फिटनेस को लेकर सख्ती से नियमों का पालन कराने के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन इसी अभियान के बीच प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। तहसीलदार सदर की विभागीय गाड़ी का प्रदूषण प्रमाणपत्र 16 अगस्त 2023 से समाप्त हो चुका है, इसके बावजूद वाहन बिना किसी रोक-टोक के सड़कों पर दौड़ता नजर आ रहा है।

मामला यहीं तक सीमित नहीं है। सरकार की ओर से VIP कल्चर समाप्त करने के दावों के बावजूद उक्त सरकारी वाहन पर नीली बत्ती भी लगी हुई है, जो नियमों के अनुसार प्रतिबंधित है। इसके साथ ही वाहन के टैक्सी परमिट को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि बिना वैध परमिट के इसका उपयोग किया जा रहा बताया जा रहा है। ऐसे में यह सवाल उठना लाज़मी है कि कानून का पालन आखिर किसके लिए है? आम जनता के लिए या सिर्फ कागजों तक सीमित है।

जब इस पूरे मामले पर तहसीलदार सदर देवानंद तिवारी से सवाल किया गया, तो उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि यह गाड़ी जिलाधिकारी द्वारा उपलब्ध कराई गई है और फिटनेस तथा अन्य कागजात की जानकारी बाद में ली जाएगी। इस बयान से यह साफ झलकता है कि पहले वाहन का इस्तेमाल किया जा रहा है और नियमों पर बाद में विचार किया जाएगा।

गौरतलब है कि जिले में सड़क सुरक्षा माह के तहत आम नागरिकों के चालान काटे जा रहे हैं। कहीं हेलमेट न होने पर कार्रवाई हो रही है तो कहीं सीट बेल्ट और प्रदूषण प्रमाणपत्र के नाम पर जुर्माना वसूला जा रहा है। ऐसे में जब खुद प्रशासनिक अधिकारी नियमों की अनदेखी करते दिखाई दें, तो अभियान की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।

प्रदूषण प्रमाणपत्र की अवधि समाप्त होना, फिटनेस को लेकर स्पष्ट जानकारी का अभाव, गैरकानूनी नीली बत्ती और परमिट से जुड़े सवाल- इन सबके बावजूद सरकारी वाहन का सड़कों पर निर्बाध संचालन व्यवस्था की गंभीर खामियों की ओर इशारा करता है। यदि नियमों को लागू करने वाले ही उनका पालन न करें, तो आम जनता से कानून के सम्मान की अपेक्षा करना मुश्किल हो जाता है।

सड़क सुरक्षा माह का उद्देश्य केवल चालान काटना नहीं, बल्कि नियमों के प्रति जागरूकता और समानता का संदेश देना है। लेकिन जब रक्षक ही नियमों को ताक पर रख दें, तो यह सिर्फ सड़क सुरक्षा का नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की साख का सवाल बन जाता है।

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