स्मार्ट मीटर व गन्ना मूल्य मुद्दे पर भाकियू टिकैत का हल्ला बोल, पुलिस मनाने में नाकाम
त्रिनाथ मिश्र, मेरठ। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी के नेतृत्व में सोमवार को किसानों ने कमिश्नरी पर तिरंगा ट्रैक्टर मार्च निकाला। सुबह से ही किसान ट्रैक्टर लेकर धरनास्थल पहुंचने लगे। यूनियन कार्यकर्ताओं ने सड़क पर टैंट लगाकर धरने की तैयारियां शुरू कर दीं और लंगर की व्यवस्था कर दी। इसके बाद किसान पंचायत का आयोजन किया गया।
धरने की सूचना पर सीओ अभिषेक तिवारी मौके पर पहुंचे और जिलाध्यक्ष के माध्यम से किसानों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन किसान अपनी मांगों पर अड़े रहे। अनुराग चौधरी ने कहा कि सुबह से हजारों किसानों की किसी ने सुनवाई नहीं की, अब यह धरना अनिश्चितकालीन चलेगा। जब तक सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, किसान कमिश्नरी से नहीं हटेंगे। उन्होंने साफ कहा कि यह जिला स्तर का मुद्दा नहीं है, इसलिए समाधान के लिए कमिश्नर को ही आना पड़ेगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसानों का शोषण कर रही है। न तो स्मार्ट मीटर लगने देंगे और न ही किसानों के अधिकारों से खिलवाड़ होने देंगे। गौरव टिकैत ने कहा कि बाढ़ जैसे हालातों के बावजूद किसान सड़क पर बैठने को मजबूर हैं। गन्ना मूल्य इतना भी नहीं मिल रहा जितना लागत आती है। सरकार पहले बताए कि पुराने मीटर हटाकर स्मार्ट मीटर लगाने से जनता को क्या फायदा होगा।
धरने को बार काउंसिल से एडवोकेट अमित दीक्षित व उनकी टीम का समर्थन मिला। उन्होंने कहा कि किसानों से जुड़े किसी भी कागजी काम के लिए उनकी टीम हमेशा तैयार है। धरने में किसानों ने ऐलान किया कि जब तक सरकार उनकी बात नहीं सुनती, वे यहीं पर डटे रहेंगे और पंचायत जारी रहेगी।
किसानों का आरोप है कि प्रशासन जगह-जगह बेवजह रूट डायवर्ट कर उन्हें घुमा रहा है, ताकि वो यहां तक न पहुंच सके। जसवंत राय हॉस्पिटल के सामने से ट्रैक्टरों को रोका जा रहा है। धरनास्थल से कुछ किसान वहां जा रहे हैं।
150 में एक समस्या का नहीं हुआ समाधान
अनुराग चौधरी ने बताया कि पिछले माह 9 जुलाई को किसानों ने अपर मंडलायुक्त अमित कुमार को 150 समस्याओं का ज्ञापन सौंपा था। विशाल धरना प्रदर्शन के बावजूद एक भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। अधिकारियों ने न तो कोई समाधान किया और न ही कोई आश्वासन दिया।
रागनी का भी आयोजन
किसानों के इस प्रदर्शन में रागनी गायक भी पहुंचे। इनके कार्यक्रम शुरू करते ही किसान सड़क पर लगे टैंट में हुक्का रखकर बैठ गए। इसके साथ साथ हस्तिनापुर बाढ़ प्रभावी इलाकों से भी सिख समुदाय के किसान यहां पहुंचे है और उनके द्वारा लंगर भी धरना स्थल पर लगाया गया है।