मेरठ में एमडीए के खिलाफ किसानों का ऐलान,विकसित भूखंड और मुआवजे की मांग को लेकर उठाई आवाज

विकसित भूखंड का वादा, अतिरिक्त मुआवजे का भरोसा और वर्षों का इंतजार! मेरठ में अब किसानों का सब्र जवाब देने लगा है। मेरठ विकास प्राधिकरण की गंगानगर, गंगानगर विस्तार, वेदव्यासपुरी और लोहियानगर आवासीय योजनाओं से प्रभावित किसानों ने अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने का ऐलान किया है। किसानों का आरोप है कि वर्ष 2015 में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित कमेटी की रिपोर्ट के बाद किसानों के साथ समझौते की शर्तें तय हुई थीं। वहीं, 28 सितंबर 2016 की एमडीए बोर्ड बैठक में भी अतिरिक्त प्रतिकर देने से संबंधित प्रस्ताव पर सहमति बनी थी। किसानों के अनुसार, कुछ छोटे किसानों को करीब 2 करोड़ 81 लाख 68 हजार रुपये का भुगतान किया गया, लेकिन कई बड़े और छोटे किसान आज भी विकसित भूखंड या मुआवजे की प्रतीक्षा कर रहे हैं। किसानों ने शासनादेश और बोर्ड बैठक में लिए गए निर्णयों का अनुपालन कराने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि जब समझौते की शर्तें तय हो चुकी हैं, तो भुगतान में देरी क्यों की जा रही है? इसी नाराजगी के चलते किसानों ने अनिश्चितकालीन धरने का रास्ता चुना है। किसानों ने अपना नारा दिया है—’प्रतिकर नहीं, तो वोट नहीं।’ अब देखना होगा कि एमडीए और प्रशासन किसानों की मांगों पर क्या निर्णय लेते हैं और वर्षों से लंबित इस मामले का समाधान कब निकलता है।

