अब खांसी की आवाज से होगी टीबी की पहचान

  • जनपद में 20 मरीजों के सैंपल के लिये की गयी खांसी की रिकॉर्डिंग
  • स्वास्थ्य विभाग ने तैयार किया टीबी कलेक्शन एप

मेरठ। टीबी एक ऐसी बीमारी है जिसका नाम सुनते ही लोगों को टेंशन हो जाती है। नयी-नयी तकनीक से इस बीमारी पर काफी हद तक काबू पा लिया गया है। अब खांसी की आवाज से टीबी की पहचान की जाएगी। इसके लिये स्वास्थ्य विभाग ने टीबी कलेक्शन एप तैयार किया है। इसके जरिए चिन्ह्ति घरों में जाकर सैंपल रिकार्ड किये जा रहे हैं। मेरठ में भी इसकी शुरुआत हो गयी है। सैंपल के तौर पर 20 लोगों की खांसी की रिकॉर्डिंग की गयी है।

जिला क्षय रोग अधिकारी डा. गुलशन राय ने बताया देश को क्षय रोग से मुक्त कराने के लिए नया एप डिजाइन किया गया है। इस एप में रोगी या चिन्ह्ति व्यक्ति की आवाज आठ बार रिकॉर्ड की जाएगी। पूरे देश से लिये जाने वाले 21 हजार सैंपल में सर्वाधिक यूपी से होंगे। प्रथम चरण के सर्वे में आवाज के सैंपल का अध्ययन होगा। इसमें से 750 टीबी रोगी होंगे। 750 नॉन टीबी एवं छह हजार टीबी लक्षण वालों के संपर्क या उनके रिश्तेदार होंगे।

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उन्होंने बताया सर्वे में जिन लोगों की खांसी की आवाज रिकॉर्ड की जाएगी उनके नाम पते गोपनीय रखे जाएंगे। उन्होंने बताया मेरठ जिले को 143 लोगों की खांसी की आवाज की रिकॉर्डिंग के सैंपल का टारगेट दिया गया है, जिसमें 20 की खांसी की आवाज के सैंपल की रिकार्डिंग हो गयी है।

ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया गया

क्षय रोग विभाग की जिला समन्वयक नेहा सक्सेना ने बताया कफ सांउड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड सोल्यूशन ट्रू डिटेक्ट टीबी को लेकर ऑनलाइन प्रशिक्षण शुरू कर दिया गया है। स्मार्ट मोबाइल में टीबी रोगी एवं अन्य लोगों की आवाज को रिकॉर्ड किया जाएगा। सैंपल उन्हीं के लिये जाएंगे जिनकी दवा शुरू नहीं हुई है। इस एप पर टीबी कफ कलेक्शन फॉर्म भरना होगा। तंबाकू एवं शराब सेवन का अपडेट करना होगा।

वर्जन

“टीबी को देश से समाप्त करने के लिये अब चिन्ह्ति क्षय रोगियों पर यह सर्वे होगा। मोबाइल एप के माध्यम से खांसी की आवाज एवं अन्य प्रकार की आवाज रिकॉर्ड की जाएगी, जिसको अध्ययन के लिये भेजा जाएगा। मेरठ से 15 रोगियों की खांसी की आवाज को रिकॉर्ड किया गया है।”

-डा. गुलशन राय, जिला क्षय रोग अधिकारी, मेरठ।