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उत्तर प्रदेश

कृषि कानून वापस करना महज एक छलावा: रालोद

संवाददाता, ई रेडियो इंडिया

यूपी के बुलंदशहर में राष्ट्रीय लोकदल द्वारा अल्पसंख्यक प्रतिनिधि सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन के माध्यम से रालोद अल्पसंख्यकों के बीच की दूरी को ख़त्म करना चाहती है, वो अपनी पैठ को और मज़बूत करना चाह रही है। गांव जुलेपुरा की सरजमीं से आग़ाज़ करते हुए इस सम्मेलन में अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश जैन ने कहा कि रालोद हमेशा से ही अल्पसंख्यकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चली है । रालोद की सरकार ने ही उर्दू को मान्यता दी थी।

पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के 1978 में गृह मंत्री रहते हुए अल्पसंख्यक आयोग का गठन किया था इसके अलावा चरण सिंह के प्रधानमंत्री रहते हुए भी तीन कैबिनेट मंत्री अल्पसंख्यक ही बने थे। उन्होंने रालोद के मंच से यह भी कहा कि अब अल्पसंख्यक और बहुसंख्यकों को मिलकर बीजेपी की सरकार को उखाड़ फेंकना है, पीएम मोदी ने कृषि क़ानून वापस करने के एलान को उन्होंने एक धोखा बताया, कहा कि साढ़े सात सौ किसानों के मारे जाने के बाद प्रधानमंत्री मोदी की नींद एक साल बाद खुली है।

बता दें कि उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष 2022 में विधानसभा चुनाव है जो कि काफी नज़दीक है अब ऐसे में सियासी पार्टियों ने वोटरों को रिझाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है अब ऐसे में देखना ये होगा कि रालोद का यह अल्पसंख्यक कार्ड कितना रंग लाता है।

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