भारत का सांस्कृतिक दूत है महाकुंभ

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प्रयागराज। महाकुम्भ 2025 महज एक धार्मिक आयोजन नहीं है। यह भारतीय सांस्कृतिक दूत है। आयोजन “ब्रांड यूपी” विजन साथ जोड़कर, उत्तर प्रदेश सरकार विदेशी निवेश आकर्षित करने, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और स्थायी पर्यटन बढ़ावा देने हेतु अपनी विरासत का लाभ उठा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मेलों में पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्रों में प्रमुख हितधारकों के साथ चर्चा का उद्देश्य महाकुम्भ इर्द-गिर्द जुड़ाव एक वैश्विक इकोसिस्टम का निर्माण होता है।

महाकुम्भ एक आयोजन से कहीं अधिक है। यह एक ऐसी जीवंत विरासत है जो साझा मान्यताओं और परंपरा माध्यम से पीढ़ियों को एक साथ जोड़ती है। यह एक ऐसा अनुभव है जो न केवल तीर्थयात्रियों को बल्कि सामूहिक आस्था की शक्ति को देखने वाले दर्शकों को भी बदल देता है। महाकुम्भ 2025 का उद्देश्य इस ऐतिहासिक संबंध को फिर से जगाना है, दुनिया को शांति, सद्भाव और सह-अस्तित्व के सार्वभौमिक मूल्य फिर से खोजने के लिए आमंत्रित करना है।

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प्रयागराज इतिहास और आध्यात्मिकता से परिपूर्ण नगर

महाकुम्भ केंद्र प्रयागराज, दरअसल इतिहास और आध्यात्मिकता से परिपूर्ण एक नगर है। तीर्थ स्थल के रूप में इस नगर का अत्यधिक महत्व है। इसे ‘तीर्थराज’ या तीर्थ स्थलों का राजा कहा जाता है। प्राचीन ग्रंथों और यात्रा वृत्तांतों में भी इसका काफी उल्लेख मिलता है।

चीनी यात्री ह्वेनसांग ने किया भव्य उत्सवों का वर्णन

आपको बता दें कि 7वीं शताब्दी में भारत आए चीनी यात्री ह्वेनसांग ने प्रयागराज को अपार प्राकृतिक सुंदरता, समृद्धि और सांस्कृतिक गहराई वाला क्षेत्र बताया था। ह्वेनसांग के लेखन में त्रिवेणी संगम को आस्था और समुदाय के मिलन स्थल के रूप में दर्शाया गया है। उन्होंने प्रयागराज में आयोजित भव्य उत्सवों का वर्णन किया है। उनके वर्णन में शासकों और धनी व्यापारियों सहित 5,00,000 से अधिक लोग शामिल हुए थे।

पवित्र जल में स्नान करने और दान की पुरानी परंपरा

उन लोगों ने पवित्र जल में स्नान करने के बाद और उदारतापूर्वक दान दिया था। यह परंपरा आज भी फल-फूल रही है। लाखों लोग अपनी आत्मा को शुद्ध करने और कालातीत एक प्राचीन अनुष्ठान में भाग लेने के लिए संगम पर एकत्रित होते हैं।
इससे पहले प्रयागराज में कुम्भ मेला 2019 में सफलता से इसके आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को अत्यधिक बल मिला और इसे विभिन्न मोर्चों पर मान्यता और प्रशंसा मिली। यह आयोजन न केवल लाखों लोगों की भक्ति का प्रमाण था, बल्कि संगठनात्मक उत्कृष्टता और वैश्विक प्रशंसा का भी प्रदर्शन था । विभिन्न देशों की सरकारों और राजदूतों ने कुम्भ मेला 2019 की जमकर सराहना की। इसने 3 गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए और 70 देशों मिशन प्रमुखों से प्रशंसा मिली है।

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4 विश्व रिकॉर्ड बनाने की योजना

महाकुम्भ 2025 इस बार कई विश्व रिकॉर्ड बनाने जा रहा है। मेला प्राधिकरण ने विभिन्न श्रेणियों में चार अलग-अलग विश्व रिकॉर्ड बनाने की योजना बनाई है। इसमें एक ही आयोजन में श्रद्धालुओं की सबसे बड़ी भीड़ का रिकॉर्ड बनने की प्रबल संभावना है।
इसके अलावा, नेत्र परीक्षण और चश्मा वितरण का विश्व रिकॉर्ड भी बनने की उम्मीद है।

ऐसा पहली बार होगा जब एक ही आयोजन में 5 लाख लोगों की आंखों की जांच और 3 लाख चश्मे बांटे जाएंगे। इस उद्देश्य से नागवासुकी पास सेक्टर 5 में लगभग 10 एकड़ में भव्य “नेत्र कुम्भ” (नेत्र मेला) लगाया गया है। पिछले नेत्र कुम्भ ने अपनी उपलब्धियों के लिए लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में स्थान प्राप्त किया था। इस वर्ष के नेत्र कुम्भ का लक्ष्य और भी उच्च मानक स्थापित करके गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान सुरक्षित करना है।

सरकार ने प्रमुख वैश्विक पर्यटन स्थल रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से स्पेन मैड्रिड और जर्मनी बर्लिन में प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पर्यटन व्यापार मेलों में महाकुम्भ 2025 को प्रदर्शित कर रही है। 24-28 जनवरी निर्धारित अंतरराष्ट्रीय पर्यटन व्यापार मेला (एफआईटीयूआर) और 4-6 मार्च, 2025 से आईटीबी बर्लिन मेला, महाकुम्भ और यूपी सांस्कृतिक विरासत समर्पित विषयगत मंडपों को आयोजित करेगा।

ये 40 वर्ग मीटर मंडप राज्य की विरासत का सार प्रस्तुत करेंगे और दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन की भव्यता को देखने के लिए वैश्विक पर्यटकों को आमंत्रित करेंगे। व्यापारी-व्यापारी (बी2बी) और व्यापारी-उपभोक्ता (बी2सी) सत्रों के लिए वीवीआईपी लाउंज का समावेश अंतरराष्ट्रीय हितधारकों के साथ रणनीतिक जुड़ाव पर जोर देता है।
इसके अतिरिक्त विभिन्न भाषाओं में प्रचार सामग्री का वितरण यह सुनिश्चित करता है कि महाकुम्भ का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व विविध दर्शकों तक पहुंचे।