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    मुत्तकी की प्रस्तावित भारत यात्रा से तिलमिलाया पाकिस्तान

    अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी की भारत यात्रा से पाकिस्तान का तिलमिलाना स्वाभाविक है, क्योंकि उसने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में शिकायत करके मुत्तकी की इसी वर्ष अगस्त में होने वाली भारत यात्रा पर प्रतिबंध लगवाया था, किन्तु भारत ने इस प्रतिबंध को खत्म करवाकर विदेश मंत्री मुत्तकी को भारत आने की अनुमति दिलाई। विदेश मंत्री मुत्तकी 9 अक्टूबर से 16 अक्टूबर तक भारत में रहेंगे। इससे पहले वह रूसी अधिकारियों के निमंत्रण पर ‘मास्को फार्मेट’ वार्ता में भाग लेने रूस जाएंगे। दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान यूएनएससी 1988 तालिबान प्रतिबंध समिति का अध्यक्ष है, फिर भी वह रूस की मास्को फार्मेट में अफगानिस्तान को हिस्सा लेने से रोक नहीं पाया।

    बहरहाल मास्को के बाद मुत्तकी भारत आएंगे। यह तालिबान के किसी नेता की पहली भारत यात्रा होगी। इससे पहले भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री ने दुबई में मुत्तकी से मुलाकात की थी। मुलाकात के दौरान विदेश सचिव मिस्त्री ने अफगानिस्तान के स्वास्थ्य क्षेत्र और शरणार्थियों के पुनर्वास के लिए भारत द्वारा की जाने वाली मानवीय सहायता के संदर्भ में बात की थी। उल्लेखनीय है कि भारत ट्रकों से जब अफगानिस्तान को सहायता और खाने की सामग्री भेजना चाहता है तो पाकिस्तान न सिर्फ एतराज करता, बल्कि अनाज और दवाइयों को खोलकर नष्ट कर देता था। पाकिस्तान इसके लिए अजीबोगरीब तर्क देता था, कहता था कि भारत को चाहिए अपने ट्रकों को पाकिस्तान के बजाय किसी और रास्ते से भेजे, क्योंकि यदि पाकिस्तान के अंदर ट्रकों पर आतंकी हमला हो गया तो भारत की फौज पाकिस्तान पर हमला कर देगी।

    पाकिस्तान की इन खुराफातों से तंग आकर ही भारत ने चाबहार बंदरगाह से अफगानिस्तान के लिए मानवीय सहायता सामग्री और बाद में भूकंप के दौरान राहत सामग्री भेजी।

    हकीकत तो यह है कि तालिबान आज भी यूएनएससी द्वारा प्रतिबंधित संगठन है। इसलिए तालिबानी नेताओं को विदेश यात्रा की अनुमति नहीं है। यूएनएससी 1988 की एक 15 सदस्यीय समिति है, जिसका अध्यक्ष पाकिस्तान है, उसी से अनुमति मिलने पर तालिबान का कोई नेता विदेश यात्रा कर सकता है। कितु यदि उक्त समिति के एक भी सदस्य ने एतराज कर दिया तो उनको यात्रा रद्द करनी पड़ती है। अगस्त में विदेश मंत्री मुत्तकी की भारत यात्रा पर पाकिस्तान के सदस्य के एतराज के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने विदेश मंत्री मुत्तकी से बात की थी। 5 सितम्बर को भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि अफगानिस्तान के विदेश मंत्री की भारत यात्रा रद्द हो गईं है। कितु सितम्बर में संयुक्त राष्ट्र महासभा के अधिवेशन में भाग लेने न्यूयार्व गए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने प्रयास करके यूएनएससी से अनुमति दिलाईं। लगता है कि पाकिस्तान की हिम्मत विदेश मंत्री मुत्तकी को मास्को यात्रा रद्द कराने की नहीं हुईं क्योंकि पाकिस्तान भी मास्को का सदस्य है। पाकिस्तान को रूस के सामने भी कटोरा परेड करना पड़ती है। इसलिए वह खुलकर मुत्तकी की रूस यात्रा का विरोध नहीं कर पाया और इसी का फायदा उठाकर भारत ने मुत्तकी की भारत यात्रा की बाधा दूर करने में कूटनीतिक सफलता हासिल कर ली।

    यह सही है कि कभी पाकिस्तान अफगानिस्तान का मित्र था या तालिबानी प्रवृत्ति का जन्मदाता था, किन्तु इन दिनों दोनों एक-दूसरे को बर्बाद करने की कसमें खा चुके हैं। भारत के लिए अफगानिस्तान बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत को चाबहार से अफगानिस्तान होते हुए सेंट्रल एशिया तक पहुंच बनाने के लिए काबुल के शासकों का सहयोग और समर्थन चाहिए। भारत इसीलिए अफगानिस्तान के तालिबानी नेताओं से अपने रणनीतिक सम्बंधों को मजबूती देने का प्रयास कर रहा है।

    कहने का सार यह है कि पाकिस्तान तालिबान को अपना शत्रु समझता है और वह नहीं चाहता कि उसके दोनों शत्रुओं के बीच मैत्री मजबूत हो, इसीलिए वह विदेश मंत्री मुत्तकी को भारत आने से रोकना चाहता था।

    पाकिस्तान की नकारात्मकता के कारण ही आज अफगानिस्तान की यह हालत हुई है। पाकिस्तान ने भले ही अफगानिस्तान में तालिबान को स्थापित करने में मदद की, किंतु वह चाहता है कि इस्लामाबाद वही करे जो इस्लामाबाद कहे। इसके विपरीत अफगानिस्तान अपनी स्वतंत्र विदेश नीति चाहता है इसलिए वह पाकिस्तान की एक नहीं सुनता। तालिबान हुक्मरान जानते हैं कि पाकिस्तान तो शोषण करता है जबकि भारत उसकी मदद करने की स्थिति में है।

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    editor

    पत्रकारिता में बेदाग 11 वर्षों का सफर करने वाले युवा पत्रकार त्रिनाथ मिश्र ई-रेडियो इंडिया के एडिटर हैं। उन्होंने समाज व शासन-प्रशासन के बीच मधुर संबंध स्थापित करने व मजबूती के साथ आवाज बुलंद करने के लिये ई-रेडियो इंडिया का गठन किया है।
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