- शास्त्री नगर में जलभराव से जनजीवन हुआ अस्त-व्यस्त
- खुदे गड्ढों में भरा पानी बना हादसों का खतरा
- लोगों ने ठेकेदार और नगर निगम पर उठाए सवाल

मेरठ में मानसून की पहली तेज बारिश ने विकास के दावों की हकीकत सामने ला दी है। सड़कें तालाब में बदल गई हैं, खुदे हुए गड्ढे मौत के जाल जैसे नजर आ रहे हैं और लोग अपने ही घरों में पानी घुसने से परेशान हैं। सवाल यह है कि करोड़ों रुपये की योजनाएं आखिर जनता की सुविधा के लिए बन रही हैं या फिर उनकी परेशानियां बढ़ाने के लिए? आखिर इस बदहाली का जिम्मेदार कौन है? आइए आपको दिखाते हैं मेरठ के शास्त्री नगर की वह तस्वीर, जिसने प्रशासनिक तैयारियों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
मेरठ के शास्त्री नगर सेक्टर-6 स्थित रंगोली रोड पर मंगलवार को हुई भारी बारिश के बाद हालात पूरी तरह बिगड़ गए। पूरी सड़क जलमग्न हो गई और जहां-जहां साएम ग्रिड योजना के तहत खुदाई की गई थी, वहां गहरे गड्ढे पानी से लबालब भर गए। पानी भरने की वजह से यह पता लगाना भी मुश्किल हो गया कि सड़क कहां खत्म हो रही है और गड्ढा कहां शुरू हो रहा है। ऐसे में यहां से गुजरने वाला हर व्यक्ति खतरे के बीच सफर करने को मजबूर दिखाई दिया।
सबसे ज्यादा परेशानी पैदल चलने वाले लोगों और दोपहिया वाहन चालकों को उठानी पड़ रही है। सड़क पर भरे पानी के कारण वाहन फिसलने का खतरा लगातार बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के बाद इस सड़क से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं रह गया है। हर पल दुर्घटना का डर बना रहता है और बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सभी दहशत में हैं।
स्थिति सिर्फ सड़क तक ही सीमित नहीं रही। बारिश का पानी सही तरीके से निकासी नहीं होने के कारण आसपास के कई घरों तक पहुंच गया। लोगों के घरों में पानी भरने से घरेलू सामान को नुकसान पहुंचा है और परिवारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि यदि जल निकासी की व्यवस्था समय रहते दुरुस्त कर दी जाती, तो उन्हें इस समस्या का सामना नहीं करना पड़ता।
उधर, क्षेत्र के व्यापारियों में भी जबरदस्त नाराजगी देखने को मिल रही है। उनका कहना है कि लंबे समय से चल रहे अधूरे निर्माण कार्य ने पहले ही उनके कारोबार को प्रभावित कर दिया था और अब बारिश ने हालात और बदतर कर दिए हैं। ग्राहकों का आना कम हो गया है, सड़क की बदहाली के कारण दुकान तक पहुंचना मुश्किल हो गया है और इसका सीधा असर व्यापार पर पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि साएम ग्रिड योजना के नाम पर सड़क की खुदाई तो कर दी गई, लेकिन काम तय समय पर पूरा नहीं किया गया। अब बारिश ने अधूरे निर्माण की पोल खोल दी है। लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते निर्माण कार्य पूरा कर दिया जाता, तो आज यह स्थिति पैदा नहीं होती।
नगर निगम के अधिकारियों ने भी ठेकेदारों की कार्यशैली पर नाराजगी जताई है। अधिकारियों का कहना है कि लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों को नोटिस जारी किया जाएगा और जवाब तलब किया जाएगा। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या केवल नोटिस जारी कर देने से लोगों की परेशानी खत्म हो जाएगी? क्योंकि जमीनी हकीकत यह है कि निर्माण कार्य अब भी बेहद धीमी गति से चल रहा है।
अब सवाल प्रशासन की तैयारियों पर भी उठ रहे हैं। जब यह पहले से तय था कि मानसून का मौसम आने वाला है, तो फिर निर्माण कार्य समय सीमा के भीतर पूरा क्यों नहीं कराया गया? बारिश से पहले जल निकासी की व्यवस्था की समीक्षा क्यों नहीं की गई? और आखिर ऐसी क्या वजह रही कि करोड़ों रुपये की परियोजना जनता के लिए राहत बनने के बजाय परेशानी का कारण बन गई?
स्थानीय लोगों की मांग है कि अधूरे निर्माण कार्य को युद्धस्तर पर पूरा कराया जाए, जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए और लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों व ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि विकास कार्यों का उद्देश्य जनता को सुविधा देना होना चाहिए, न कि उन्हें रोजाना नई परेशानियों में धकेलना।
फिलहाल शास्त्री नगर की यह तस्वीर सिर्फ एक सड़क की कहानी नहीं है, बल्कि उन तैयारियों पर भी सवाल है जो हर साल मानसून से पहले किए जाने के दावे किए जाते हैं। अब देखना होगा कि नगर निगम और संबंधित विभाग इस समस्या का समाधान कितनी जल्दी करते हैं या फिर मेरठ की जनता को आने वाले दिनों में भी ऐसे ही जलभराव, बदहाल सड़कों और अधूरे विकास कार्यों की कीमत चुकानी पड़ेगी।









