Sakat Chauth Vrat: सकट चौथ व्रत एंव व्रत का महत्व

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Sakat Chauth Vrat: सकट चौथ का व्रत का महत्व सबसे ज्यादा माना जाता है हिन्दू धर्म में कई ऐसे व्रत और त्योहार होते हैं, जिनका खास महत्व होता है. वही इन्हीं में से एक है संकट चौथ…

बता दें यह व्रत हर साल जनवरी के महिने में मनाया जाता है जहा इस बार सकट व्रत 21 जनवरी को मनाया जाएगा पर क्या आप जानते है कि इस व्रत को और किन नामों से जाना जाता है? अगर नही तो चालिए आपको बतातें है-

Sakat Chauth Vrat:-

सकट चौथ ये दिन भगवान गणेश जी की पूजा करने और व्रत रखने का विधान है. सकट चौथ का व्रत रखने से संतान और परिवार सुरक्षित रहता है, जीवन के सभी संकट दूर होते हैं, विघ्नहर्ता श्री गणेश जी की कृपा से कार्यों में सफलता और जीवन में सुख समृद्धि मिलती है.

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Sakat Chauth Vrat इन नामों से भी है प्रचलित-

देश के अलग अल ग हिस्सों में सकट चौथ को अलग अलग नामों से जाना जाता है, लेकिन सबका उद्देश्य एक ही होता है. वो है भगवान गणेश की पूजा और उनको प्रसन्न करना. पंचांग के अनुसार, हर साल माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सकट चौथ मनाया जाता है.

आइए जानते हैं कि सकट चौथ को और किन नामों से जाना जाता है?
1-संकटा चौथ
2-लंबोदर संकष्टी चतुर्थी
3-माघी चौथ
4-तिलकुटा चौथ

Sakat Chauth Vrat का महत्व-

Sakat Chauth Vrat का व्रत सभी संकटों को हरने वाला होता है, इसलिए इसे संकटा चौथ भी कहते हैं. सकट चौथ का व्रत संतान की सुरक्षा और परिवार की खुशहाली के लिए रखा जाता है. इस दिन गणेश जी की पूजा में दूर्वा और मोदक भी अर्पित करते हैं. गणेश जी की कृपा से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और दुख और संकट दूर हो जाते हैं.

Sakat Chauth Vrat की पूजा का शुभ मुहूर्त-

Sakat Chauth Vrat के दिन सौभाग्य योग सुबह से लेकर दोपहर 03 बजकर 06 मिनट तक है, उसके बाद से शोभन योग प्रारंभ हो जाएगा. यह 22 जनवरी को दोपहर तक है. ये दोनों ही योग मांगलिक कार्यों के लिए अच्छे माने जाते हैं.21 जनवरी को सुबह 09:43 बजे तक मघा नक्षत्र है, इसे मांगलिक कार्यों के लिए अच्छा नहीं मानते हैं. इस वजह से आप इस समय के बाद ही सकट चौथ की पूजा करें, तो ठीक रहेगा.