मेरठ में उत्तर प्रदेश पुलिस आरक्षी भर्ती की शारीरिक दक्षता परीक्षा के पहले ही दिन आठ अभ्यर्थियों का बीमार पड़ना और दो के पैर में फ्रैक्चर होना गंभीर चिंता का विषय है। छठी वाहिनी पीएसी परिसर में शुरू हुई इस परीक्षा में 828 अभ्यर्थियों ने 25 मिनट में 4.8 किलोमीटर की दौड़ पूरी करने की चुनौती स्वीकार की। परीक्षा सुबह पांच बजे शुरू की गई, फिर भी शारीरिक दबाव और गर्मी के कारण कई अभ्यर्थियों की तबीयत बिगड़ गई।
पुलिस भर्ती में शारीरिक दक्षता परीक्षा स्वाभाविक और आवश्यक चरण है। पुलिसकर्मियों को कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ता है, इसलिए उनकी शारीरिक क्षमता का आकलन जरूरी है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं होना चाहिए कि परीक्षा की कठोरता अभ्यर्थियों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ने लगे। भर्ती प्रक्रिया का उद्देश्य सक्षम और स्वस्थ पुलिसकर्मियों का चयन करना है, न कि युवाओं को शारीरिक जोखिम में डालना।
इस मामले में राहत की बात यह है कि परीक्षा स्थल पर मेडिकल टीमें, पैरामेडिकल स्टाफ और एंबुलेंस मौजूद थे तथा तबीयत बिगड़ने पर अभ्यर्थियों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। इससे आपात चिकित्सा व्यवस्था की उपयोगिता साबित होती है। मगर सवाल यह भी है कि क्या इतनी बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की परीक्षा के लिए स्वास्थ्य संबंधी तैयारियां केवल आकस्मिक उपचार तक सीमित रहनी चाहिए?
करीब सात दिनों तक चलने वाली इस प्रक्रिया में लगभग 4,500 अभ्यर्थियों के शामिल होने की संभावना है। ऐसे में अगले दिनों के लिए मौसम, तापमान, ट्रैक की स्थिति और अभ्यर्थियों की शारीरिक तैयारी को ध्यान में रखकर व्यवस्थाओं की लगातार समीक्षा जरूरी है। स्वास्थ्य कार्ड की जांच के साथ दौड़ से पहले पर्याप्त वार्म-अप, जलापूर्ति, विश्राम और चिकित्सकीय निगरानी को भी प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए।
विशेषकर ग्रामीण और छोटे शहरों से आने वाले युवाओं के लिए पुलिस भर्ती रोजगार का बड़ा अवसर होती है। वर्षों की तैयारी और आर्थिक-सामाजिक संघर्ष के बाद वे परीक्षा तक पहुंचते हैं। इसलिए किसी दुर्घटना या गंभीर चोट के कारण उनका भविष्य प्रभावित होना केवल व्यक्तिगत क्षति नहीं, बल्कि भर्ती व्यवस्था की मानवीय संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़ा करता है।
पुलिस बल को शारीरिक रूप से सक्षम युवाओं की जरूरत है, लेकिन भर्ती की प्रक्रिया भी वैज्ञानिक और संवेदनशील होनी चाहिए। कठोर परीक्षा और सुरक्षित परीक्षा—दोनों एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। मेरठ में पहले दिन की घटनाओं से प्रशासन को यही सबक लेना चाहिए कि आने वाले दिनों में सुरक्षा और चिकित्सा इंतजामों को और मजबूत किया जाए, ताकि प्रतिभा की परीक्षा हो, स्वास्थ्य की नहीं।

