
- भारत-चीन समेत कई देशों पर 100% टैरिफ का प्रस्ताव
- अमेरिकी सीनेट में विधेयक को मिल चुकी है मंजूरी
नई दिल्ली/वॉशिंगटन। रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिका में नए प्रतिबंधों और टैरिफ को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। अमेरिकी सीनेट में एक द्विदलीय विधेयक पेश किया गया है, जिसमें रूस से तेल खरीदने वाले देशों के उत्पादों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान प्रस्तावित है। भारत और चीन इस प्रस्ताव के प्रमुख देशों में शामिल हैं।
यह विधेयक रूस पर प्रतिबंधों से जुड़े कानून के नए संस्करण का हिस्सा है। अमेरिकी सांसदों के अनुसार, इसका उद्देश्य रूस की ऊर्जा आय और उससे जुड़े व्यापारिक नेटवर्क पर दबाव बढ़ाना है। प्रस्ताव में रूस के ऊर्जा, वित्तीय और रक्षा क्षेत्रों के साथ-साथ उसके व्यापारिक नेटवर्क पर प्रतिबंध मजबूत करने की बात भी कही गई है।
हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में पेश एक संशोधन में भारत और चीन के अलावा तुर्की, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाकिया, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिज गणराज्य का भी नाम लिया गया है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत रूसी तेल की खरीद जारी रखने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है।
हालांकि, सीनेट से पारित संस्करण में इन देशों के नाम सीधे तौर पर शामिल नहीं किए गए हैं। इसमें रूसी तेल और गैस के पांच बड़े आयातकों को लक्षित करने का प्रावधान रखा गया है। हाउस में प्रस्तावित संशोधनों के बाद विधेयक का अंतिम स्वरूप बदल सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा प्रस्ताव में रूस से गैस खरीदने वाले 15 यूरोपीय देशों को संभावित टैरिफ से छूट देने की व्यवस्था भी है। इसके पीछे इन देशों की रूसी गैस पर सीमित निर्भरता और रूस से ऊर्जा निर्भरता घटाने के प्रयासों को आधार बताया गया है।
भारत दुनिया के बड़े कच्चे तेल आयातकों में शामिल है और हाल के वर्षों में रूस उसके प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में रहा है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने मई में करीब 2.15 करोड़ मीट्रिक टन कच्चे तेल का आयात किया था। रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिका की ओर से दी गई छूट की अवधि भी महत्वपूर्ण है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, भारत को रूस के तेल से जुड़े अमेरिकी प्रतिबंधों में मिली छूट 17 जून 2026 को समाप्त हो गई।
रूस के खिलाफ प्रस्तावित कानून के पुराने संस्करण में रूसी तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान बताया गया था। नए संस्करण में प्रस्तावित अधिकतम सीमा 100 प्रतिशत है।
अमेरिकी सांसदों का तर्क है कि रूसी तेल से होने वाली आय मॉस्को की यूक्रेन में युद्ध क्षमता को बनाए रखने में मदद करती है। प्रस्ताव में रूसी नेतृत्व, ऊर्जा क्षेत्र और कथित ‘शैडो फ्लीट’ पर प्रतिबंधों को मजबूत करने की बात भी शामिल है।
सीनेट ने 7 अगस्त को विधेयक के एक संस्करण को 86-11 वोट से पारित किया था। अब हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में इस पर प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। हाउस में टैरिफ संबंधी प्रावधान को हटाने समेत कई संशोधन प्रस्तावित हैं। इसलिए फिलहाल 100 प्रतिशत टैरिफ अमेरिकी अंतिम नीति नहीं है।
हाउस से मंजूरी और बाद की विधायी प्रक्रिया के बाद ही विधेयक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास हस्ताक्षर के लिए जाएगा। यदि 100 प्रतिशत टैरिफ का प्रावधान अंतिम कानून में शामिल रहता है और भारत इसके दायरे में आता है, तो इसका असर भारत से अमेरिका निर्यात होने वाले सामान पर पड़ सकता है। हालांकि, वास्तविक प्रभाव अंतिम कानून में शामिल देशों, वस्तुओं और संभावित छूट पर निर्भर करेगा।







