E RADIO INDIA

राष्ट्र की डिजिटल आवाज

नाट्यशाला

निमित्त भाव से करें प्रत्येक कर्म

नई दिल्ली, इस संसार रूपी नाट्यशाला के दो प्रमुख अंग सुख एवं दुख हैं। इनका इस पंच भौतिक शरीर से अटूट संबंध है। जिस प्रकार एक प्रबुद्ध आत्मा सुख को ईश्वर का आशीर्वाद समझकर उसको स्वीकार करती है, ठीक उसी…