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  • कांग्रेस और सपा के बीच बढ़ रही दूरियां

    Akhilesh Yadav and Rahul Gandhi, SP and Congress
    • चुनावी नतीजे के बाद कांग्रेस और सपा के बीच बढ़ रही दूरी
    • क्या टूट जाएगा सपा और कांग्रेस का साथ
    • आखिर क्यों हो रहा है चर्चाओं का बाजार गर्म

    लोकसभा चुनाव के बाद ‘इंडिया’ ब्लॉक की दो सबसे बड़ी पार्टियों, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच जो सद्भाव दिखा था वह एक बार फिर तनाव में बदल गया। महाराष्ट्र विधानसभा और उत्तर प्रदेश की नौ सीटों के उपचुनाव से इसकी शुरुआत हुई थी, जो संसद के शीतकालीन सत्र तक पहुंचते पहुंचते चरम पर पहुंच गई है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के उपचुनाव में सपा ने कांग्रेस के लिए दो सीटें छोड़ने का प्रस्ताव दिया था, जिसे कांग्रेस ने ठुकरा दिया था। एक तो कांग्रेस दो सीट से संतुष्ट नहीं थी और दूसरे दोनों सीटें ऐसी थीं, जिन पर जीतने का कोई चांस नहीं था। तभी कांग्रेस ने उपचुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया। 23 नवंबर को नतीजे आए तो सपा सिर्फ दो सीटें जीत पाई और अच्छी खासी मुस्लिम आबादी वाली तीन सीटों पर हार गई।

    अब संसद के शीतकालीन सत्र में दोनों पार्टियों के बीच नया विवाद शुरू हो गया है। पहला तो संभल को लेकर हुआ। कांग्रेस के नेता अडानी के मसले पर संसद ठप्प किए हुए थे, जबकि समाजवादी पार्टी के नेता संभल का मुद्दा उठाए हुए थे। संभल की शाही जामा मस्जिद के सर्वे और उसके बाद हुई हिंसा में चार लोग मारे गए हैं। सपा चाहती थी कि इस मसले पर चर्चा हो। लेकिन कांग्रेस ने पहले हफ्ते अडानी के मसले पर संसद ठप्प किया।

    दूसरे हफ्ते के दूसरे दिन यानी मंगलवार, तीन दिसंबर से संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने का फैसला हुआ तो एक तरफ सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने संसद में संभल पर अपनी बात रखने का फैसला किया तो दूसरी ओर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने संभल जाने का कार्यक्रम बना लिया। सबको पता था कि पुलिस संभल नहीं जाने देगी। फिर भी राहुल और प्रियंका बुधवार, चार दिसंबर को निकले और गाजीपुर बॉर्डर पर तीन घंटे तक रूके रहे। उधर अखिलेश ने लोकसभा में संभल पर भाषण दिया और उसे सोची समझी साजिश बताया। लेकिन सपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस ने जान बूझकर सारा फोकस राहुल और प्रियंका पर बनवा दिया। सपा को लग रहा है कि कांग्रेस मुस्लिम वोट की अपनी स्वतंत्र राजनीति कर रही है।

    तनाव का दूसरा कारण लोकसभा में बैठने की नई व्यवस्था की वजह है। चुनाव नतीजों के बाद अखिलेश यादव पहली कतार में राहुल गांधी के साथ ही बैठते थे। लेकिन अब उनकी सीट अलग कर दी गई। सपा के नेता मान रहे हैं कि कांग्रेस ने जान बूझकर ऐसा किया है ताकि संसद की कार्यवाही के दौरान सारा फोकस राहुल गांधी पर रहे। गौरतलब है कि अगली कतार में स्पीकर के दाहिने तरफ पहले ब्लॉक की पहली सीट प्रधानमंत्री की होती है और बायीं तरफ आठवें ब्लॉक की पहली सीट नेता प्रतिपक्ष की होती है। इस तरह नेता प्रतिपक्ष की सीट और पूरा आठवां ब्लॉक प्रधानमंत्री और स्पीकर दोनों के सामने होती है और कैमरे के फोकस में भी होती है।

    सपा के नेता मान रहे हैं कि तभी कांग्रेस ने अखिलेश यादव और उनकी पार्टी फैजाबाद से जीते सांसद अवधेश प्रसाद की सीट वहां से हटवाई। अब अखिलेश छठे ब्लॉक में बैठेंगे। इस मसले पर तनाव इतना है कि सीट आवंटन के बाद पहली बार सदन में घुसते ही अखिलेश ने कांग्रेस पर तंज करते हुए कहा ‘धन्यवाद कांग्रेस’! गौरतलब है कि विपक्ष को आवंटित सात सीटों में किस पार्टी को कितनी मिलेंगी और कौन कहां बैठेगा इसका फैसला मुख्य विपक्षी पार्टी यानी कांग्रेस को करना था। इसके बाद कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने अखिलेश के पास जाकर उनसे कहा कि वे राहुल गांधी के साथ बैठें, लेकिन अखिलेश ने इंकार कर दिया।

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    News Desk

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