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  • 1947 में पाकिस्तान की आबादी 40 करोड़… नहीं-नहीं 40 लाख

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    इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की फिर उनके बयानों के चलते बेइज्जती हुई है। रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आजादी के वक्त पाकिस्तान की आबादी 40 करोड़ थी और आज 22 करोड़ है। इमरान के इस झूठ को सुनकर लोगों को हंसी आ गई। सच्चाई यह है कि विभाजन के समय यानि 1947 में पाकिस्तान की आबादी 4 करोड़ थी, जिसमे 96 फीसदी मुस्लिम थे।

    इमरान खान के इस बयान का वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें वह कहते हैं, ‘लोगों को हम कैसे इंसाफ दे सकते हैं। आप यह सोचिए कि पाकिस्तान की आबादी चा… चालीस करोड़ थी। जब पाकिस्तान बना, तब इसकी आबादी 40 करोड़ थी। आज 22 करोड़ है।’ इसी बीच मंच पर खड़ा एक शख्स उन्हें टोकता है कि चालीस लाख। इसके जवाब में इमरान कहते हैं कि नहीं-नहीं 40 करोड़।

    इमरान के बयान का खूब उड़ रहा मजाक

    पूर्व पीएम इमरान के बयान से यह तो साफ हो जाता है कि आजादी के समय पाकिस्तान की आबादी कितनी थी… यह उन्हें नहीं पता है। उलटा दूसरों को वह गलत जानकारी दे रहे हैं। इंटरनेट पर यूजर्स उनकी इस बात की खूब मजाक उड़ा रहे हैं। देश के पूर्व प्रधानमंत्री को पाकिस्तान की जनसंख्या की सही जानकारी नहीं होने पर लोग हैरानी भी जाहिर कर रहे हैं। कई लोगों ने उन्हें तैयारी के बाद रैली को संबोधित करने की सलाह दी है।

    पाकिस्तान की मौजूदा जनसंख्या 22 करोड़ से अधिक

    मालूम हो कि फिलहाल पाकिस्तान की कुल जनसंख्या 22 करोड़ से अधिक है। इनमें मुसलमान की तादात 95 फीसदी से अधिक है। राष्ट्रीय जनगणना के आधार पर तैयार रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में 22,10,566 हिंदू, 18,73,348 ईसाई,1,88,340 अहमदिया,74,130 सिख, 14,537 बहाई और 3,917 पारसी हैं। देश में 11 अन्य अल्पसंख्यक समुदाय हैं जिनकी आबादी दो हजार से कम है।

    गधे से तुलना करने वाला बयान

    इमरान खान के बयान का इससे पहले भी मजाक उड़ चुका है। कुछ दिनों पहले इमरान खान के इंटरव्यू का एक हिस्सा सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसमें वह कह रहे हैं- मैं ब्रिटिश सोसाइटी का हिस्सा भी था, उन्होंने मुझे वेलकम किया, बहुत कम लोगों को ब्रिटिश सोसाइटी इस तरह स्वीकार करती है। लेकिन मैने कभी उसको अपना घर नहीं समझा। क्योंकि मैं पाकिस्तानी था, मैं जो मर्जी कर लूं… मैं अंग्रेज तो बन नहीं सकता। आप अगर गधे के ऊपर लकीरें डाल दें तो वो जेबरा नहीं बन जाता। वो गधा, गधा ही रहता है।

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    Neha Singh

    नेहा सिंह इंटर्न डिजिटल पत्रकार हैं। अनुभव की सीढ़ियां चढ़ने का प्रयत्न जारी है। ई-रेडियो इंडिया में वेबसाइट अपडेशन का काम कर रही हैं। कभी-कभी एंकरिंग में भी हाथ आजमाने से नहीं चूकतीं।
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