The third launch pad will be built in Sriharikota, it will be ready in 4 years at a cost of Rs 3984.86 crore
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने आज गुरुवार को राज्यसभा में बताया कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में तीसरा लॉन्च पैड (TLP) स्थापित करेगा। इस प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार ने 3984.86 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है और इसे अगले चार वर्षों में पूरा किया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि ISRO अपने नए ‘नेक्स्ट जेनरेशन लॉन्च व्हीकल’ (NGLV) पर काम कर रहा है, जो 90 मीटर ऊंचा और 1000 टन वजनी होगा। मौजूदा लॉन्च पैड इस तरह के भारी और बड़े रॉकेट लॉन्च करने के लिए सक्षम नहीं हैं, इसलिए नया लॉन्च पैड बनाया जा रहा है। इस लॉन्च पैड को इस तरह से डिजाइन किया जाएगा कि इसमें भविष्य में भारत के मानवयुक्त चंद्र मिशन के लॉन्च की भी सुविधा हो।
उन्होंने कहा कि नए लॉन्च पैड में ‘टिलटेबल अंबिलिकल टावर’ (TUT) होगा, जिससे रॉकेट को क्षैतिज रूप में तैयार कर उसे वर्टिकल स्थिति में लाया जा सकेगा। इसके अलावा, NGLV का पहला चरण नौ इंजनों के समूह के साथ तैयार किया जा रहा है, जिसकी ‘हॉट टेस्टिंग’ लॉन्च पैड पर ही होगी, जिससे अलग से परीक्षण केंद्र बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर (SAC) की भूमिका महत्वपूर्ण
राज्यसभा में एक अन्य जवाब में केंद्रीय मंत्री ने बताया कि अहमदाबाद स्थित स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर (SAC) 1966 से ISRO की प्रमुख अनुसंधान इकाई के रूप में कार्य कर रहा है। इसे डॉ. विक्रम साराभाई ने स्थापित किया था। SAC ने चंद्रयान-3 मिशन, क्वांटम टेक्नोलॉजीज, कृषि, समुद्र विज्ञान और आपदा प्रबंधन के लिए सैटेलाइट तकनीकों के विकास में अहम योगदान दिया है।
SAC ने अब तक कई उन्नत टेक्नोलॉजी विकसित की हैं, जिनमें नासा-ISRO सिंथेटिक अपर्चर रडार (NISAR) के लिए S-बैंड SAR, चंद्रयान-3 के लिए लैंडर और रोवर कैमरे, नेविगेशन सिस्टम और संचार उपग्रहों के लिए हाई-थ्रूपुट संचार पेलोड शामिल हैं।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि SAC वर्तमान में GSAT-7R, रिसोर्ससैट-3, ओशन्सैट-3A, G20 सैटेलाइट, भारत-मॉरीशस संयुक्त उपग्रह (IMJS), GSAT-N3 और IDRSS-2 समेत कई महत्वपूर्ण उपग्रहों के पेलोड विकसित कर रहा है।

