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  • मोदी का यह फार्मूला 2024 के लिए बनेगा संजीवनी

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    भारतीय जनता पार्टी के दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि, ‘दस वर्षों में उनकी सरकार ने जो सफलताएं हासिल की हैं, वह पड़ाव मात्र है, यानि अभी उन्हें बहुत सारे कार्य करने हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी ने बीते शनिवार को राष्ट्रीय अधिवेशन के पहले दिन भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धाजंलि स्वरूप आगामी लोकसभा में 370 सीटें जीतने का आग्रह किया था और यह भी बताया था कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उन्हें क्या करना चाहिए, लेकिन रविवार को उन्होंने अपने दस वर्षों के कार्यकाल की उपलब्धियों का ब्योरा पेश किया और अगले कार्यकाल में करने वाले कार्यों की रूपरेखा भी प्रस्तुत की। जाहिर सी बात है कि प्रधानमंत्री ने अपनी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को स्पष्ट संकेत दे दिया है कि पार्टी तीसरी बार फिर सत्ता में आने वाली है और अब उसकी जिम्मेदारियां एवं चुनौतियां दोनों बढ़ जाएंगी।

    असल में राजनेता का चातुर्य एवं नेतृत्व क्षमता का यह महत्वपूर्ण मापदंड है कि वह किस तरह अपने कार्यकर्ताओं को आशावादी सूत्र में बांधे रहता है और भविष्य की योजनाओं और उसके लक्ष्य निर्धारण के लिए रणनीति बनाता है। मोदी ने कार्यकर्ताओं को स्पष्ट संकेत दिया कि अब चुनाव बहुत नजदीक है, इसलिए अब शायद पार्टी का राष्ट्रीय अधिवेशन इस सरकार की कार्यावधि में अंतिम हो, इसलिए उनका संवाद बेहद महत्वपूर्ण है।

    सच तो यह है कि सारी योजनाएं, रणनीति और लक्ष्य निर्धारण में सबसे बड़ी भूमिका प्रधानमंत्री मोदी की ही होती है। उनकी कार्यशैली उस वक्त भी यही थी, जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे और आज भी वह अपने व्यवहार एवं विशेष शैली से भाजपा कार्यकर्ताओं को इस बात का संदेश देने में सफल होते हैं कि वे उनके साथ मिलकर न मात्र संकल्प ले रहे हैं, बल्कि लक्ष्य प्राप्ति के लिए मिलकर पहले की तरह ही कार्य करते रहेंगे।

    मोदी इस बात को अच्छी तरह जानते हैं कि सरकार के कुछ कठोर फैसलों का सीधा असर उन वर्गों पर पड़ा है, जो भाजपा और भारतीय जनसंघ के स्थापना काल से ही उसके समर्थक रहे हैं। उदाहरण के लिए जीएसटी को ही ले लीजिए। मध्यमवर्गीय व्यवसायी भाजपा के साथ हमेशा ही रहे हैं, किन्तु टैक्स सुधार के इस प्रावधान से उन्हीं पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ा। यदि मोदी जैसा असरदार और सियासत का कुशल खिलाड़ी भाजपा के पास न होता तो निश्चित रूप से इस वर्ग ने बहुत पहले ही भाजपा को छोड़ दिया होता, किन्तु मोदी जिस तरह अपने समर्थकों को जोड़े रहने का प्रयास करते हैं और उनके अंदर एक उम्मीद की किरण जगाए रहते हैं कि आगे सब ठीक हो जाएगा।

    उससे यह वर्ग कठोर फैसलों को बर्दाश्त करके भी भाजपा के साथ खुश रहता है। इसलिए भाजपा के नाराज व्यवसायी समर्थक भी पार्टी का साथ नहीं छोड़ते, क्योंकि उनके लिए भाजपा से अच्छी कोई पार्टी ही नहीं है।

    यह सच है कि प्रधानमंत्री मोदी के बोलने की शैली और उसका भाव उनके समर्थकों को उत्साहित तो करता है, किन्तु उनके विरोधियों को और अधिक निराशा का शिकार बना देता है। देश में 17 लोकसभा के चुनाव हो चुके हैं, किन्तु जितने उत्साह और उम्मीद से भाजपा के कार्यकर्ता भरे हैं, उसका एक मात्र कारण है नरेन्द्र मोदी का व्यक्तिगत एवं मधुर बर्ताव। अपने कार्यों की लम्बी सूची वह कार्यकर्ताओं को पकड़ाते हैं और वे गांव, गली मोहल्लों में उसे प्रचारित करते हैं। यह कला तो उसी के पास होना संभव है, जो जमीनी नेता हैं। मोदी ऐसे ही जमीनी नेता हैं, जो अपने कार्यकर्ताओं को चुनाव जीतने का मंत्र और कठिन समय में भी उत्साहित रहने का फार्मूला बताते हैं। राजनीतिक पार्टी कोई भी हो, कार्यकर्ता और समर्थक ऐसा ही नेता पसंद करते हैं।

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    News Desk

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