
यात्रा की दुनिया में बदलाव केवल नई जगहों और नए पर्यटन स्थलों के कारण नहीं आता, यात्रियों की सोच भी पर्यटन की दिशा बदलती है। Gen Z ने इसी बदलाव को तेज किया है। इस पीढ़ी के लिए यात्रा अब साल में एक बार लंबी छुट्टी लेकर किसी लोकप्रिय स्थान पर जाने तक सीमित नहीं है। यात्रा उनकी दिनचर्या, मनोदशा, पसंद और जरूरतों के अनुरूप छोटे-छोटे अनुभवों में बंट रही है।Airbnb और YouGov की साझेदारी में आई ‘नेवर द सेम: द न्यू रूल्स ऑफ द Gen Z ट्रैवल इन इंडिया’ रिपोर्ट के मुताबिक, युवा भारतीय यात्रियों में यात्रा के कई नए तरीके लोकप्रिय हो रहे हैं। इनमें छोटी यात्राएं, आराम को प्राथमिकता, कम चर्चित स्थानों की खोज और तनाव से राहत के लिए यात्रा जैसे रुझान शामिल हैं। ये बदलाव पर्यटन उद्योग के लिए भी संकेत हैं कि आने वाले समय का यात्री केवल दर्शनीय स्थलों की सूची नहीं, बल्कि व्यक्तिगत अनुभव चाहता है।माइक्रो-कैशन इसका स्पष्ट उदाहरण है। 24 से 72 घंटे की छोटी यात्रा रोजमर्रा की व्यस्तता से तत्काल राहत देने का माध्यम बन रही है। रिपोर्ट के अनुसार, Gen Z के 66 प्रतिशत लोग यात्रा से कुछ दिन या कुछ सप्ताह पहले बुकिंग करते हैं और 87 प्रतिशत एक सप्ताह से कम अवधि की यात्रा पसंद करते हैं। इससे स्पष्ट है कि लंबी योजना वाली वार्षिक छुट्टियों के बजाय छोटे और अपेक्षाकृत सहज ब्रेक का चलन बढ़ रहा है।रूम रॉटिंग यात्रा की पारंपरिक धारणा को और बदलता है। इसमें घूमने के बजाय ठहरने की जगह पर आराम करना ही यात्रा का उद्देश्य बन जाता है। होटल या होमस्टे में समय बिताना, आराम करना और कुछ न करने का आनंद लेना भी अब यात्रा का वैध अनुभव माना जा रहा है। यानी पर्यटन में गतिविधियों की संख्या से ज्यादा मानसिक विश्राम का महत्व बढ़ रहा है।इसी तरह डी-इन्फ्लुएंस्ड ट्रैवल सोशल मीडिया से पैदा हुई पर्यटन की एकरूपता के विरुद्ध प्रतिक्रिया है। वायरल और अत्यधिक लोकप्रिय स्थानों की बजाय कम चर्चित जगहों को तलाशने की इच्छा बढ़ रही है। रिपोर्ट में 90 प्रतिशत युवा यात्रियों के कम प्रसिद्ध और अनदेखे स्थानों को पसंद करने की बात सामने आती है। इससे पर्यटन को भीड़ से अलग व्यक्तिगत खोज का रूप मिल रहा है।मिरर ट्रिप और व्हाई-कैशन यात्रा को व्यक्ति की पहचान और भावनाओं से जोड़ते हैं। कोई यात्री प्रकृति में शांति खोजता है, कोई खानपान या संस्कृति का अनुभव करना चाहता है और कोई रोमांच को प्राथमिकता देता है। यानी एक ही पर्यटन स्थल सबके लिए समान अनुभव नहीं रह गया है। यात्री अपनी रुचि के अनुसार यात्रा की कहानी खुद गढ़ना चाहता है।लोकल लॉर हंटिंग इस बदलाव को और दिलचस्प बनाता है। अब स्थानीय बाजार, मोहल्ले, किराने की दुकानें और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े स्थान भी पर्यटन अनुभव का हिस्सा बन रहे हैं। 81 प्रतिशत Gen Z यात्रियों का स्थानीय जीवन से जुड़े ऐसे स्थानों को देखने की रुचि जताना बताता है कि पर्यटक अब किसी शहर को केवल स्मारकों से नहीं, बल्कि वहां के जीवन से समझना चाहता है।मेंटी बी ट्रैवल में यात्रा मानसिक थकान और तनाव से राहत का माध्यम बनती है।
यात्रा की दुनिया में बदलाव केवल नई जगहों और नए पर्यटन स्थलों के कारण नहीं आता, यात्रियों की सोच भी पर्यटन की दिशा बदलती है। Gen Z ने इसी बदलाव को तेज किया है। इस पीढ़ी के लिए यात्रा अब साल में एक बार लंबी छुट्टी लेकर किसी लोकप्रिय स्थान पर जाने तक सीमित नहीं है। यात्रा उनकी दिनचर्या, मनोदशा, पसंद और जरूरतों के अनुरूप छोटे-छोटे अनुभवों में बंट रही है।Airbnb और YouGov की साझेदारी में आई ‘नेवर द सेम: द न्यू रूल्स ऑफ द Gen Z ट्रैवल इन इंडिया’ रिपोर्ट के मुताबिक, युवा भारतीय यात्रियों में यात्रा के कई नए तरीके लोकप्रिय हो रहे हैं। इनमें छोटी यात्राएं, आराम को प्राथमिकता, कम चर्चित स्थानों की खोज और तनाव से राहत के लिए यात्रा जैसे रुझान शामिल हैं। ये बदलाव पर्यटन उद्योग के लिए भी संकेत हैं कि आने वाले समय का यात्री केवल दर्शनीय स्थलों की सूची नहीं, बल्कि व्यक्तिगत अनुभव चाहता है।माइक्रो-कैशन इसका स्पष्ट उदाहरण है। 24 से 72 घंटे की छोटी यात्रा रोजमर्रा की व्यस्तता से तत्काल राहत देने का माध्यम बन रही है। रिपोर्ट के अनुसार, Gen Z के 66 प्रतिशत लोग यात्रा से कुछ दिन या कुछ सप्ताह पहले बुकिंग करते हैं और 87 प्रतिशत एक सप्ताह से कम अवधि की यात्रा पसंद करते हैं। इससे स्पष्ट है कि लंबी योजना वाली वार्षिक छुट्टियों के बजाय छोटे और अपेक्षाकृत सहज ब्रेक का चलन बढ़ रहा है।रूम रॉटिंग यात्रा की पारंपरिक धारणा को और बदलता है। इसमें घूमने के बजाय ठहरने की जगह पर आराम करना ही यात्रा का उद्देश्य बन जाता है। होटल या होमस्टे में समय बिताना, आराम करना और कुछ न करने का आनंद लेना भी अब यात्रा का वैध अनुभव माना जा रहा है। यानी पर्यटन में गतिविधियों की संख्या से ज्यादा मानसिक विश्राम का महत्व बढ़ रहा है।इसी तरह डी-इन्फ्लुएंस्ड ट्रैवल सोशल मीडिया से पैदा हुई पर्यटन की एकरूपता के विरुद्ध प्रतिक्रिया है। वायरल और अत्यधिक लोकप्रिय स्थानों की बजाय कम चर्चित जगहों को तलाशने की इच्छा बढ़ रही है। रिपोर्ट में 90 प्रतिशत युवा यात्रियों के कम प्रसिद्ध और अनदेखे स्थानों को पसंद करने की बात सामने आती है। इससे पर्यटन को भीड़ से अलग व्यक्तिगत खोज का रूप मिल रहा है।मिरर ट्रिप और व्हाई-कैशन यात्रा को व्यक्ति की पहचान और भावनाओं से जोड़ते हैं। कोई यात्री प्रकृति में शांति खोजता है, कोई खानपान या संस्कृति का अनुभव करना चाहता है और कोई रोमांच को प्राथमिकता देता है। यानी एक ही पर्यटन स्थल सबके लिए समान अनुभव नहीं रह गया है। यात्री अपनी रुचि के अनुसार यात्रा की कहानी खुद गढ़ना चाहता है।लोकल लॉर हंटिंग इस बदलाव को और दिलचस्प बनाता है। अब स्थानीय बाजार, मोहल्ले, किराने की दुकानें और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े स्थान भी पर्यटन अनुभव का हिस्सा बन रहे हैं। 81 प्रतिशत Gen Z यात्रियों का स्थानीय जीवन से जुड़े ऐसे स्थानों को देखने की रुचि जताना बताता है कि पर्यटक अब किसी शहर को केवल स्मारकों से नहीं, बल्कि वहां के जीवन से समझना चाहता है।
