
Yuva Brahman Samaj Meerut ने शुक्रवार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे—मेरठ हाईकोर्ट बेंच—पर विस्तृत चर्चा करते हुए मेरठ बार एसोसिएशन को औपचारिक समर्थन पत्र सौंपा। यह सहयोग न सिर्फ अधिवक्ताओं के आंदोलन को मजबूती देता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि अब यह मुहिम केवल विधिज्ञ समुदाय की नहीं, बल्कि जन-जन की आवाज़ बन चुकी है। संगठन की प्रतिनिधि मंडली ने मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय शर्मा और महामंत्री राजेंद्र सिंह राणा से मुलाकात की और हाईकोर्ट बेंच की स्थापना को लेकर जारी आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के करोड़ों नागरिकों के लिए यह न्यायिक आवश्यकता है।
इस अवसर पर युवा ब्राह्मण समाज रजिस्टर्ड उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष पंडित अश्वनी कौशिक ने कहा कि पिछले कई दशकों से हाईकोर्ट बेंच की मांग लगातार की जा रही है। अधिवक्ताओं, सामाजिक संगठनों, व्यापारिक वर्ग और आम नागरिकों ने समय-समय पर इस आंदोलन को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में न्याय हर व्यक्ति तक सुलभ होना चाहिए, लेकिन इलाहाबाद तक लंबी दूरी, समय की बर्बादी, और खर्च इस क्षेत्र के लोगों पर अनावश्यक बोझ डालता है। हाईकोर्ट बेंच का गठन न सिर्फ समय की मांग है बल्कि न्याय के संवैधानिक अधिकार को सशक्त बनाने का कदम भी है।
Yuva Brahman Samaj Meerut ने हाईकोर्ट बेंच की लड़ाई को बताया जनहित का मुद्दा
जनपद मेरठ तथा पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में न्यायिक सुविधाओं के विस्तार को लेकर जो आवाज़ बीते कई वर्षों से उठाई जा रही है, उसे नई शक्ति युवाओं और सामाजिक संगठनों ने दी है। Yuva Brahman Samaj Meerut के प्रदेश सलाहकार समिति संयोजक प्रशांत कौशिक ने कहा कि हाईकोर्ट बेंच का आंदोलन किसी वर्ग विशेष का आंदोलन नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र की न्यायिक, सामाजिक और आर्थिक आवश्यकता से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने कहा कि इलाहाबाद की दूरी और मुकदमों की बढ़ती संख्या के कारण आम लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। यदि मेरठ में हाईकोर्ट बेंच स्थापित होती है, तो लाखों नागरिकों को राहत मिलेगी, न्याय में विलंब कम होगा और न्याय तक पहुंच आसान होगी।
प्रशांत कौशिक ने आगे कहा कि सरकार को इस मुद्दे पर बिना देरी के ठोस निर्णय लेना चाहिए। वर्षों से लंबित पड़े इस मसले ने न सिर्फ लोगों को परेशान किया है बल्कि विकास की रफ्तार पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाला है। उन्होंने कहा कि “न्याय तभी सार्थक है, जब वह समय पर मिले और सबके लिए सुलभ हो।”
Yuva Brahman Samaj Meerut के संरक्षकों और पदाधिकारियों ने कहा—न्याय सस्ता और सुलभ बने
संगठन के संरक्षक प्रेम कुमार शर्मा ने कहा कि न्याय व्यवस्था का मूल सिद्धांत है—सस्ता, सुलभ और त्वरित न्याय। यह तब तक संभव नहीं जब तक मेरठ में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना न की जाए। उन्होंने कहा कि इलाहाबाद की दूरी के कारण लोगों को कई बार अपने केसों की पैरवी में कठिनाइयां आती हैं, जिससे जनता का विश्वास भी प्रभावित होता है। हाईकोर्ट बेंच बनने से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लोगों को समान रूप से लाभ मिलेगा।
अधिवक्ता एवं पार्षद सुमित शर्मा ने कहा कि यह मांग बहुत पुरानी है और वर्षों से लगातार उठाई जा रही है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि सरकार इस मुद्दे पर तत्काल ध्यान दे, क्योंकि करोड़ों नागरिकों को इससे राहत मिलेगी। वरिष्ठ समाजसेवी दीपक शर्मा ने कहा कि यह आंदोलन अब जन आंदोलन में बदलना चाहिए ताकि सरकार पर दबाव बढ़े और बेंच की स्थापना शीघ्र हो सके।
व्यापारी नेता पुनीत शर्मा ने कहा कि न्यायिक सुविधाओं का विस्तारीकरण विकास की महत्वपूर्ण नींव है। उन्होंने सुझाव दिया कि बच्चों, शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संगठनों और व्यापारिक इकाइयों को भी इस अभियान से जोड़ा जाए। जनभागीदारी जितनी अधिक होगी, आंदोलन उतना ही प्रभावी होगा।
मेरठ बार एसोसिएशन ने समर्थन के लिए जताया आभार
संगठन के प्रदेश प्रभारी डॉ. विशाल शर्मा ने कहा कि जनभागीदारी आंदोलन की सफलता की कुंजी है। यदि जनता इस मुद्दे को मजबूती से उठाती है तो सरकार को निर्णय लेने में देरी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट बेंच न सिर्फ अधिवक्ताओं का विषय है, बल्कि यह प्रदेश के करोड़ों नागरिकों की न्यायिक और आर्थिक जरूरत है।
इस बीच मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा कि Yuva Brahman Samaj Meerut द्वारा दिया गया समर्थन अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे यह स्पष्ट होता है कि अब यह आंदोलन समाज के हर वर्ग में जगह बना चुका है। उन्होंने कहा कि युवाओं का सहयोग आंदोलन को नई ऊर्जा देता है और इससे सरकार का ध्यान इस दिशा में अवश्य जाएगा।
महामंत्री राजेंद्र सिंह राणा ने भी संगठन के सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले कई महीनों से चल रहा यह आंदोलन अब निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों के बढ़ते सहयोग से यह उम्मीद मजबूत हुई है कि हाईकोर्ट बेंच की स्थापना शीघ्र संभव है।
भविष्य की रणनीति और आंदोलन का विस्तार
संगठन ने आगे कहा कि आने वाले समय में आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। युवा, व्यापारी, किसान, अधिवक्ता, शिक्षाविद और सामाजिक संगठन मिलकर जनजागरूकता अभियान चलाएंगे। पोस्टर अभियान, जागरूकता रैलियां, वाद-विवाद प्रतियोगिताएं और जनसभाएं आयोजित की जाएंगी ताकि अधिक से अधिक लोग इस मुद्दे से जुड़ सकें।
संगठन का यह भी मानना है कि हाईकोर्ट बेंच का गठन न सिर्फ मेरठ बल्कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति देगा। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, वकीलों और नए विधि छात्रों के लिए करियर विकल्प विस्तार होगा, व्यवसायियों और उद्योगों को फायदा मिलेगा, और न्यायिक व्यवस्था मजबूत होगी।
मुख्य उपस्थित सदस्य
कार्यक्रम में मुख्य रूप से पंडित अश्वनी कौशिक, प्रशांत कौशिक, डॉ. प्रेम कुमार शर्मा, पुनीत शर्मा, डॉ. विशाल शर्मा, सीमा शर्मा, दीपक शर्मा, अतुल त्यागी निक्कू, संजीव कुमार शर्मा एडवोकेट, सुमित शर्मा एडवोकेट पार्षद, तुषार कौशिक एडवोकेट, प्रदीप वत्स, सत्यपाल दत्त शर्मा सहित कई सदस्य उपस्थित रहे।
हाईकोर्ट बेंच की स्थापना अब केवल मांग नहीं—आवश्यकता है। Yuva Brahman Samaj Meerut द्वारा दिया गया समर्थन अधिवक्ताओं के इस लंबे संघर्ष को नई दिशा देता है। जनता की बढ़ती भागीदारी और संगठनों का सहयोग यह संकेत देता है कि न्याय सुलभता की इस मुहिम को अब व्यापक जनसमर्थन प्राप्त हो चुका है। यदि सरकार जनभावना को गंभीरता से लेती है, तो हाईकोर्ट बेंच की स्थापना जल्द से जल्द संभव हो सकती है।
