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  • अमिता कमल
  • रेडियो उद्घोषिका, आकाशवाणी, ज्ञान वाणी एफएम
हर दिन कोई न कोई दिवस होता ही है। वर्ष 2012 से पहले रेडियो का कोई दिवस नहीं था, तो इस कमी को पूरा करने की दृष्टि से 20 अक्टूबर 2010 में स्पेनिश रेडियो अकादमी के अनुरोध पर स्पेन ने संयुक्त राष्ट्र में रेडियो को समर्पित विश्व दिवस मनाने के लिए सदस्य देशों का ध्यान आकर्षित किया। जिसे स्वीकार कर लिया गया और संयुक्त राष्ट्र के शैक्षणिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन यूनेस्को ने पेरिस में आयोजित 36वीं आमसभा में 3 नवंबर 2011 को घोषित किया कि प्रत्येक वर्ष 13 फरवरी का दिन ‘विश्व रेडियो दिवस‘ के तौर पर मनाया जायेगा।
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यह दिन इसलिए चुना गया क्योंकि इसी दिन संयुक्त राष्ट्र संघ के ‘रेडियो यूएनओ’ की वर्षगांठ भी होती है। इसी दिन 13 फरवरी 1946 को यह रेडियो स्टेशन स्थापित हुआ था, उसी की याद को इस दिवस के तौर पर मनाया जाता है। विश्व के सभी देशों के रेडियो प्रसारकों और श्रोताओं को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से शुरू की गई यह पहल अपने उद्देश्यों में सफल रही है।

महान भारतीय वैज्ञानिक सर जगदीश चंद्र बोस ने सबसे पहले रेडियो की खोज की परन्तु आर्थिक कठिनाइयों के कारण वह इसे व्यवहारिक रूप नहीं दे सके। आधुनिक रेडियो की खोज इटली के महान वैज्ञानिक मार्कोनी ने की। उन्होंने रेडियो का अविष्कार किया। मार्कोनी को उनके अविष्कार के लिए वर्ष 1909 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार दिया गया था।

परन्तु टीवी के अविष्कार के बाद से रेडियो सुनने वाले श्रोताओं में कमी आई है। गांव में इसकी लोकप्रियता वैसी ही है। शायद यही कारण रहा कि माननीय प्रधानमंत्री जी ने अपने मन की बात पहुँचाने का जरिया रेडियो को ही चुना।

कुछ देशों में रेडियो शिक्षा पहुंचाने का काम करता है। भारत में इसी बात को ध्यान में रखकर वर्ष 2000 में भारत का पहला शैक्षणिक रेडियो स्थापित किया गया। जिसका उद्देश्य देश के जन-जन तक शिक्षा का प्रचार प्रसार करना है। इस रेडियो का नाम दिया गया ‘ज्ञान वाणी।’ ज्ञान वाणी अपने कई कार्यक्रमों के साथ लोगों का मनोरंजन तो कराता ही है साथ ही साथ शैक्षणिक जानकारी भी अपने श्रोताओं तक पहुंचाता है।

एक सर्वे के अनुसार सबसे ज्यादा रेडियो भारत के किसान और फौजी वर्ग के लोग सुनते हैं। इस बात की प्रमाणिकता उनके द्वारा आये फोन कॉल्स और संदेशों से पता चलता है। यह एक मात्र ऐसा माध्यम है जिसकी पहुंच और माध्यमों के मुकाबले काफी अधिक है। सरकार को इस सुन्दर माध्यम की ओर ध्यान देना चाहिए।

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