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  • चंद्रशेखर की नई पार्टी से किसके छूट रहे पसीने

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Lucknow. हाल ही में यूपी के तेजी से उभरते दलित नेता चंद्रशेखर उर्फ रावण ने अपनी पार्टी का ऐलान किया है। भीम आर्मी के नाम से दलितों में राजनीतिक समझ का संचार करने वाले चंद्रशेखर की राजनीतिक पार्टी का ऐलान यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के लिये चिंता का सबब बन गया है। अब त्रिकोणीय मुकाबले की ओर दलित राजनीति का झुकाव यह साबित कर रहा है कि जातीय समीकरण का तिलिस्म चरमराने ही वाला है।
भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद ने बसपा के संस्थापक कांशीराम की जयंती के मौके पर 15 मार्च को अपनी पार्टी का ऐलान किया। उन्होंने आजाद समाज पार्टी बनाई है। उनकी इस पार्टी ने बहुजन समाज पार्टी की नींद उड़ाई है।
यूपी में एक तरफ भाजपा सरकार के तीन साल पूरे हो रहे हैं, यही नहीं यूपी में पहली बार भाजपा का कोई एक मुख्यमंत्री लगातार तीन साल तक पद पर रहने का रिकार्ड बना रहा है तो दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का कहना है कि एक ज्योतिष ने उनसे कहा है कि अगले चुनाव में समाजवादी पार्टी प्रदेश की 403 में से 350 सीटें जीतेगी।
एक तरफ कांग्रेस पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी की राजनीतिक सक्रियता से मायावती परेशान हैं और दूसरी ओर चंद्रशेखर ने कांशीराम की विरासत पर दावेदारी करते हुए नई पार्टी बना दी है। कहा जा रहा है कि परदे के पीछे से समाजवादी पार्टी का समर्थन आजाद को मिल रहा है। सबको पता है कि अगर दलित वोट का बंटवारा कांग्रेस, बसपा और आजाद की पार्टी में होता है तो सबसे ज्यादा फायदा समाजवादी पार्टी को होगा। इस राजनीति में भाजपा को भी कोई नुकसान नहीं हो रहा है इसलिए आजाद की राजनीति को भाजपा का भी मौन समर्थन है।
रही बात मायावती की…. तो आने वाला वक्त ही बतायेगा कि उनका राजनीतिक भविष्य किस करवट बैठेगा। ऐसा लगता है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कई कद्दावर नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा चुकीं मायावती को अब अपनी जमीन और भी मजबूत बनाने के लिये किसी निकटतम विश्वसनीय सहयोगी की तलाश जारी है।

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